वन स्टेशन वन प्रोडक्ट: सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर श्रावणी मेले में केसरिया वस्त्रों की धूम
सारांश
मुख्य बातें
सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना के तहत स्थापित विशेष आउटलेट इस वर्ष श्रावणी मेले में केसरिया और भगवा रंग में रंग गया है। भागलपुर जिले के इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पर देशभर से आने वाले शिवभक्त कांवरियों के लिए भगवा वस्त्रों की विशेष प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।
आउटलेट पर क्या मिल रहा है
स्टेशन पर स्टाल संचालित कर रहे व्यापारी अनिल सिंघानिया ने बताया, 'मुझे वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के तहत यहाँ स्टाल मिला है। मेरी दुकान पर श्रावणी मेले का झोला, पैंट, टीशर्ट और बनियान मिलेगा।' उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों और जिलों से कांवरिए यहाँ गंगाजल भरने आते हैं और फिर बाबा बैजनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं।
सिंघानिया के अनुसार, 'यह अजगवी धाम है, यहाँ से लोग गंगाजल लेकर जाते हैं और बाबा बैजनाथ को अर्पित करते हैं। भक्तिमय माहौल को देखते हुए केसरिया और भगवा वस्त्र की माँग बढ़ जाती है। सुल्तानगंज की हर गली और मोड़ केसरियामय हो गई है।'
योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
रेल मंत्रालय के अनुसार, 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना का मुख्य उद्देश्य देशभर के रेलवे स्टेशनों पर भारत के स्वदेशी और विशिष्ट उत्पादों एवं शिल्पकला को प्रोत्साहन देना है। इन उत्पादों में स्थानीय जनजातियों द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ, हथकरघा, लकड़ी की नक्काशी, चिकनकारी, जरी-जरदोजी जैसे हस्तशिल्प तथा स्थानीय रूप से उगाए गए मसाले, चाय, कॉफी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।
गौरतलब है कि यह योजना 25 मार्च 2022 से प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे पर पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। इसके तहत संबंधित क्षेत्र में उत्पादित एक स्वदेशी उत्पाद की पहचान कर स्टेशन पर उसकी बिक्री के लिए स्थान आवंटित किया जाता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
भारतीय रेलवे का लक्ष्य इस योजना के ज़रिए स्थानीय निर्माताओं और कारीगरों को सीधे बाज़ार उपलब्ध कराना है, ताकि स्थानीय कर्मचारियों के कौशल और आजीविका में सुधार हो सके। वर्तमान में यह एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में चल रही है और इस स्तर पर धनराशि की आवश्यकता का आकलन अभी नहीं किया गया है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज में लाखों कांवरियों का आवागमन होता है, जिससे स्थानीय व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। योजना इस धार्मिक पर्यटन को स्थानीय उद्यमिता से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास मानी जा रही है।
आगे की राह
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर इसे और अधिक स्टेशनों तक विस्तारित करने की योजना है। सुल्तानगंज जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों पर इस योजना की सफलता इसे एक मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।