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वन स्टेशन वन प्रोडक्ट: सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर श्रावणी मेले में केसरिया वस्त्रों की धूम

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वन स्टेशन वन प्रोडक्ट: सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर श्रावणी मेले में केसरिया वस्त्रों की धूम

सारांश

श्रावणी मेले में सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना का रंग केसरिया हो गया है। कांवरियों की उमड़ती भीड़ के बीच भगवा वस्त्रों की बिक्री ने इस रेलवे योजना को धार्मिक पर्यटन से जोड़ दिया है — स्थानीय उद्यमिता और आस्था का अनूठा संगम।

मुख्य बातें

सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना के तहत श्रावणी मेले में केसरिया व भगवा वस्त्रों की विशेष बिक्री हो रही है।
व्यापारी अनिल सिंघानिया को योजना के तहत स्टाल आवंटित हुआ, जहाँ झोला, पैंट, टीशर्ट और बनियान उपलब्ध हैं।
भारतीय रेलवे ने यह पायलट परियोजना 25 मार्च 2022 से प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे पर शुरू की थी।
योजना का उद्देश्य स्थानीय शिल्पकला, हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों को रेलवे स्टेशनों के ज़रिए बाज़ार उपलब्ध कराना है।
सुल्तानगंज अजगवी धाम है, जहाँ से कांवरिए गंगाजल लेकर बाबा बैजनाथ धाम जाते हैं।

सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना के तहत स्थापित विशेष आउटलेट इस वर्ष श्रावणी मेले में केसरिया और भगवा रंग में रंग गया है। भागलपुर जिले के इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पर देशभर से आने वाले शिवभक्त कांवरियों के लिए भगवा वस्त्रों की विशेष प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।

आउटलेट पर क्या मिल रहा है

स्टेशन पर स्टाल संचालित कर रहे व्यापारी अनिल सिंघानिया ने बताया, 'मुझे वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के तहत यहाँ स्टाल मिला है। मेरी दुकान पर श्रावणी मेले का झोला, पैंट, टीशर्ट और बनियान मिलेगा।' उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों और जिलों से कांवरिए यहाँ गंगाजल भरने आते हैं और फिर बाबा बैजनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं।

सिंघानिया के अनुसार, 'यह अजगवी धाम है, यहाँ से लोग गंगाजल लेकर जाते हैं और बाबा बैजनाथ को अर्पित करते हैं। भक्तिमय माहौल को देखते हुए केसरिया और भगवा वस्त्र की माँग बढ़ जाती है। सुल्तानगंज की हर गली और मोड़ केसरियामय हो गई है।'

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

रेल मंत्रालय के अनुसार, 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना का मुख्य उद्देश्य देशभर के रेलवे स्टेशनों पर भारत के स्वदेशी और विशिष्ट उत्पादों एवं शिल्पकला को प्रोत्साहन देना है। इन उत्पादों में स्थानीय जनजातियों द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ, हथकरघा, लकड़ी की नक्काशी, चिकनकारी, जरी-जरदोजी जैसे हस्तशिल्प तथा स्थानीय रूप से उगाए गए मसाले, चाय, कॉफी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

गौरतलब है कि यह योजना 25 मार्च 2022 से प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे पर पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। इसके तहत संबंधित क्षेत्र में उत्पादित एक स्वदेशी उत्पाद की पहचान कर स्टेशन पर उसकी बिक्री के लिए स्थान आवंटित किया जाता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

भारतीय रेलवे का लक्ष्य इस योजना के ज़रिए स्थानीय निर्माताओं और कारीगरों को सीधे बाज़ार उपलब्ध कराना है, ताकि स्थानीय कर्मचारियों के कौशल और आजीविका में सुधार हो सके। वर्तमान में यह एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में चल रही है और इस स्तर पर धनराशि की आवश्यकता का आकलन अभी नहीं किया गया है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज में लाखों कांवरियों का आवागमन होता है, जिससे स्थानीय व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। योजना इस धार्मिक पर्यटन को स्थानीय उद्यमिता से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास मानी जा रही है।

आगे की राह

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर इसे और अधिक स्टेशनों तक विस्तारित करने की योजना है। सुल्तानगंज जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों पर इस योजना की सफलता इसे एक मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सफलता तब होगी जब बुनकर, कुम्हार और हस्तशिल्पी इस मंच से सालोंभर जुड़ सकें। पायलट परियोजना के तीन वर्षों बाद भी धनराशि के आकलन का न होना यह सवाल उठाता है कि क्रियान्वयन की गति नीति की महत्वाकांक्षा से मेल खा रही है या नहीं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना क्या है?
यह भारतीय रेलवे की एक पहल है जिसके तहत देशभर के रेलवे स्टेशनों पर उस क्षेत्र के स्वदेशी और विशिष्ट उत्पादों की बिक्री के लिए स्टाल, किओस्क और बिक्री केंद्र स्थापित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और निर्माताओं को सीधे बाज़ार उपलब्ध कराना है।
सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर इस योजना के तहत क्या बेचा जा रहा है?
सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर श्रावणी मेले के अवसर पर केसरिया और भगवा वस्त्र — जैसे झोला, पैंट, टीशर्ट और बनियान — बेचे जा रहे हैं। ये वस्त्र विशेष रूप से शिवभक्त कांवरियों की माँग को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
यह पायलट परियोजना कब शुरू हुई थी?
'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' की पायलट परियोजना 25 मार्च 2022 से प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे पर शुरू की गई थी। इसके तहत संबंधित क्षेत्र के एक स्वदेशी उत्पाद की पहचान कर स्टेशन पर उसकी बिक्री के लिए स्थान आवंटित किया जाता है।
श्रावणी मेले में सुल्तानगंज का क्या महत्व है?
सुल्तानगंज को 'अजगवी धाम' भी कहा जाता है, जहाँ से लाखों कांवरिए गंगाजल भरकर बाबा बैजनाथ धाम को अर्पित करने के लिए रवाना होते हैं। श्रावण माह में यहाँ देशभर के विभिन्न राज्यों और जिलों से कांवरियों का बड़ा जमावड़ा होता है।
इस योजना से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होता है?
योजना के तहत स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को रेलवे स्टेशन जैसे उच्च-यातायात स्थलों पर बिक्री का अवसर मिलता है। इससे उनके कौशल को बाज़ार मिलता है और आजीविका में सुधार का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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