ओवैसी का BJP-RSS पर तीखा हमला: भाईचारे की बात, मुसलमानों को टिकट नहीं — UP चुनाव पर भी बोले
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 31 अगस्त को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर कड़े सवाल दागे — भाईचारे के दावों से लेकर मुस्लिम प्रतिनिधित्व, सिंधु जल संधि और धार्मिक स्वतंत्रता तक। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम की तैयारियाँ जारी हैं और वे 20 सितंबर के बाद राज्य का दौरा करेंगे।
UP चुनाव: अभी संख्या नहीं, तैयारी जारी
ओवैसी ने कहा कि फिलहाल उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर कोई आँकड़ा या आकलन देना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनसभाएँ आयोजित की जाएंगी। एआईएमआईएम चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है, लेकिन संभावित सीटों या प्रदर्शन का कोई अनुमान अभी साझा करने से उन्होंने इनकार किया।
सिंधु जल संधि: निलंबन के साथ ठोस योजना भी जरूरी
सिंधु जल संधि के मुद्दे पर ओवैसी ने कहा कि संधि को निलंबित करना एक बात है, लेकिन इसके बाद पानी के भंडारण और उपयोग की व्यावहारिक योजना भी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारत पानी रोकता है तो उसे कहाँ जमा किया जाएगा और किस तरह इस्तेमाल होगा। उनके शब्दों में, 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते' — लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि संधि से जुड़े फैसले के बाद पानी का रुख किस दिशा में मोड़ा जाएगा।
भाईचारे का दावा बनाम मुस्लिम प्रतिनिधित्व
ओवैसी ने BJP पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ भाईचारे की बात की जाती है, जबकि दूसरी तरफ मुसलमानों को चुनावी टिकट नहीं दिया जाता। उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), मॉब लिंचिंग, धार्मिक सभाओं के नाम पर हिंसा और बुलडोजर कार्रवाई जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए पूछा कि ऐसे माहौल में भाईचारा कहाँ है। उन्होंने लोगों के घर गिराने जैसी कार्रवाइयों को गलत और जनता को भ्रमित करने वाला बताया।
RSS पर लोकतंत्र-विरोधी विचारधारा का आरोप
ओवैसी ने RSS पर लोकतंत्र में विश्वास न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन की विचारधारा में 'एक झंडा, एक नेता, एक विचारधारा' की अवधारणा मिलती है। उनका यह भी आरोप है कि RSS अलग-अलग मंचों पर अपने विचारों के अलग-अलग संस्करण पेश करता है। साथ ही, उन्होंने उन लोगों की पहचान करने की माँग की जो मुसलमानों के भारत में रहने पर सवाल उठाते हैं, और दावा किया कि ऐसी मानसिकता RSS की विचारधारा से प्रभावित है।
अमेरिकी दबाव का संदर्भ
ओवैसी ने अमेरिकी विदेश विभाग के धार्मिक स्वतंत्रता कार्यालय का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, हाल के कुछ बयान इसी बाहरी दबाव के कारण दिए जा रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। आने वाले महीनों में UP चुनाव की रणनीति और एआईएमआईएम की भूमिका और स्पष्ट होगी।