पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का निधन: मोदी सरकार से लेकर विपक्ष तक, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राज्यपाल, प्रख्यात शिक्षाविद और समाजसेवी पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को निधन हो गया। त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और डीवाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक के रूप में उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दशकों तक अमिट छाप छोड़ी। उनके निधन पर देशभर के राजनेताओं ने गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विभिन्न संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने तक उनकी यात्रा एवं शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को शांति तथा शोकाकुल परिजनों और उनके शुभचिंतकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।'
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर लिखा, 'उनके जाने से एक दूरदर्शी व्यक्तित्व चला गया। मैं उन्हें दिल से श्रद्धांजलि देता हूं। हम उनके परिवार के दुख में शामिल हैं।'
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'एक दूरदर्शी शिक्षाविद, समाजसेवी एवं बिहार के पूर्व राज्यपाल के रूप में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। उनका प्रेरणादायी जीवन सदैव स्मरणीय रहेगा।'
विपक्ष की संवेदनाएं
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, 'शिक्षा और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान सदा स्मरणीय रहेगा। सभी शोकाकुल परिजनों, शुभचिंतकों और समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।'
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, 'शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके योगदान ने लाखों लोगों के जीवन को छुआ है। देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।'
डॉ. पाटिल का योगदान
डॉ. डीवाई पाटिल ने डीवाई पाटिल ग्रुप की स्थापना कर महाराष्ट्र सहित देशभर में चिकित्सा, इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक संस्थान खड़े किए। उनके संस्थानों ने लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर दिया। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. पाटिल ने त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर व्यापक बहस चल रही है। डॉ. पाटिल के संस्थान इस दिशा में एक मॉडल के रूप में देखे जाते रहे हैं। उनके निधन से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हुआ है। डीवाई पाटिल ग्रुप के भविष्य और उनके द्वारा स्थापित संस्थानों की दिशा पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।