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पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का कोल्हापुर में निधन, एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले ने दी श्रद्धांजलि

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पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का कोल्हापुर में निधन, एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

भारतीय उच्च शिक्षा के एक युग का अंत हो गया। पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल ने 7 विश्वविद्यालय, 146 से अधिक कोर्स और विश्व के छठे सर्वश्रेष्ठ स्टेडियम की विरासत छोड़ी। उनके निधन पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद सुप्रिया सुले ने गहरा शोक व्यक्त किया।

मुख्य बातें

डीवाई पाटिल का 4 अगस्त 2026 को कोल्हापुर में निधन हो गया।
वे बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल, विधायक और मंत्री रहे।
उन्होंने देश में 7 स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित किए; डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी में 146 से अधिक कोर्स संचालित हैं।
नवी मुंबई में उनके द्वारा बनाया डीवाई पाटिल स्टेडियम दुनिया का छठा सर्वश्रेष्ठ स्टेडियम माना जाता है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद सुप्रिया सुले ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।

महाराष्ट्र के著名 शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का 4 अगस्त 2026 को कोल्हापुर में निधन हो गया। उनके जाने से भारतीय उच्च शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है। महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान

डॉ. डीवाई पाटिल ने देश में सात स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया — एक उपलब्धि जो भारतीय शिक्षा जगत में विरले ही किसी के नाम है। डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ और आर्किटेक्चर सहित 16 से अधिक विषयों में 146 से ज़्यादा कोर्स संचालित होते हैं। उन्होंने 'शैक्षणिक उत्कृष्टता' और 'संपूर्ण शिक्षा' के सिद्धांतों को अपनी संस्थाओं की नींव बनाया।

स्वास्थ्य और खेल में भी अमिट छाप

कोल्हापुर, पुणे और नवी मुंबई में डॉ. पाटिल द्वारा स्थापित अस्पताल लाखों मरीज़ों के लिए सेवा का केंद्र बने, जहाँ हर वर्ग के लोगों को बेहतर इलाज मिला। खेल के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा — नवी मुंबई में उन्होंने अत्याधुनिक डीवाई पाटिल स्टेडियम का निर्माण कराया, जिसे दुनिया का छठा सबसे बेहतरीन स्टेडियम माना जाता है। इस स्टेडियम ने भारत में खेल-अवसंरचना के नए मानक स्थापित किए।

प्रशासनिक जीवन और राजनीतिक सेवा

शिक्षा और समाजसेवा के साथ-साथ डॉ. पाटिल ने प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। एक विधायक और मंत्री के रूप में भी उन्होंने दशकों तक जनसेवा की। तीनों राज्यों में उन्होंने राज्यपाल पद की गरिमा को नई ऊँचाई दी।

नेताओं की श्रद्धांजलि

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि डॉ. पाटिल के निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी नेता, महान शिक्षाविद और उदार मार्गदर्शक खो दिया है। शिंदे ने लिखा कि संस्थान बनाना आसान होता है, लेकिन उसे अनुशासन, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ चलाना बहुत बड़ी चुनौती है — और डॉ. डीवाई पाटिल ने यह काम सहजता से किया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. पाटिल ने लाखों युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा के रास्ते खोले और उनका भविष्य संवारा। सुले ने कहा, 'शिक्षा और समाज के क्षेत्र में डॉ. डीवाई पाटिल साहब के योगदान को आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगी।' उन्होंने परिवार के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

आगे की राह

डॉ. पाटिल द्वारा स्थापित शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थाओं का भविष्य अब उनके परिवार और ट्रस्ट के नेतृत्व पर निर्भर करेगा। उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उन लाखों छात्रों और मरीज़ों के प्रति एक प्रतिबद्धता है जिनकी ज़िंदगी उनके संस्थानों ने बदली।

संपादकीय दृष्टिकोण

सेवा माना जाता था। सात विश्वविद्यालय खड़े करना और उन्हें अनुशासन व सामाजिक जवाबदेही के साथ चलाना, आज की निजी शिक्षा संस्थाओं के लिए एक कठिन मानक है। राजनीतिक पार्टियों की सीमाओं से परे — शिंदे से लेकर सुले तक — सभी ने जो एकस्वर में श्रद्धांजलि दी, वह बताती है कि उनकी विरासत वास्तव में निर्विवाद थी। अब असली परीक्षा यह है कि उनकी संस्थाएँ उनके मूल्यों को जीवित रख पाती हैं या नहीं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. डीवाई पाटिल कौन थे?
डॉ. डीवाई पाटिल पद्मश्री से सम्मानित महाराष्ट्र के著名 शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल थे। उन्होंने देश में 7 स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित किए और लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर दिया।
डॉ. डीवाई पाटिल का निधन कब और कहाँ हुआ?
डॉ. डीवाई पाटिल का निधन 4 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ।
डॉ. डीवाई पाटिल की शैक्षणिक विरासत क्या है?
डॉ. पाटिल ने देश में 7 स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित किए, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी में 16 से अधिक विषयों में 146 से ज़्यादा कोर्स पढ़ाए जाते हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ और आर्किटेक्चर शामिल हैं।
एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्स पर कहा कि डॉ. पाटिल के निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी नेता और महान शिक्षाविद खो दिया। सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगी और उनकी दूरदर्शिता के कारण लाखों परिवारों का जीवन बेहतर हुआ।
डीवाई पाटिल स्टेडियम क्यों प्रसिद्ध है?
नवी मुंबई में स्थित डीवाई पाटिल स्टेडियम को दुनिया का छठा सबसे बेहतरीन स्टेडियम माना जाता है। डॉ. पाटिल ने इसे अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बनवाया, जिसने भारत में खेल-अवसंरचना के नए मानक स्थापित किए।
राष्ट्र प्रेस
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