पाकिस्तान के राजस्व को अवैध सिगरेट व्यापार से 300 अरब रुपए का नुकसान: हालिया रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- अवैध सिगरेट व्यापार से पाकिस्तान के राजस्व को हर साल **300 अरब रुपए** का नुकसान।
- सरकार को अर्थव्यवस्था को संभालने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
- राजस्व में कमी के कारण विकास कार्यों में कटौती।
- निगरानी और नियंत्रण के उपाय अपर्याप्त।
- टैक्स चोरी पर काबू पाना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के तंबाकू उद्योग में बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, सालाना 300 अरब रुपए से अधिक का अनुमानित नुकसान हो रहा है, जो कि देश के बढ़ते वित्तीय संकट के बीच एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, सिगरेट का अवैध व्यापार सरकारी राजस्व को लगातार हानि पहुँचा रहा है। इस स्थिति में, अधिकारी टैक्स लक्ष्यों को पूरा करने और बढ़ते बजट घाटे को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और राजस्व जुटाने में कमजोरी के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
अंकड़ों से यह पता चला कि फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) मार्च में अपने टैक्स लक्ष्यों से 185 अरब रुपए पीछे रह गया। उसने 1,367 अरब रुपए के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,182 अरब रुपए ही जुटाए।
इस निरंतर राजस्व कम होने के कारण, सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर, जल, बिजली और प्रांतीय परियोजनाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खर्च में कटौती करनी पड़ी है, जिससे देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पर खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तंबाकू क्षेत्र में होने वाले भारी नुकसान के बावजूद, निगरानी और नियंत्रण के उपाय अभी भी अपर्याप्त हैं। निगरानी की कमी और ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम का सही से काम न करना अवैध उत्पादन और तस्करी को बढ़ावा दे रहा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व के रिसाव को रोकने के बजाय, बार-बार उन क्षेत्रों पर टैक्स का बोझ डालना जो पहले से ही नियमों का पालन कर रहे हैं, वित्तीय असंतुलन को और बढ़ा रहा है।
तंबाकू क्षेत्र में टैक्स चोरी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने से राजस्व घाटे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे कल्याणकारी और विकास कार्यों पर वित्तीय गुंजाइश बनेगी, और देश की आंतरिक व बाहरी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी मजबूत होगी।
एक अन्य रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज मात्र 360 दिनों के भीतर 71 ट्रिलियन रुपए से बढ़कर 80.5 ट्रिलियन रुपए हो गया। यह 9 ट्रिलियन रुपए की वृद्धि उस अवधि में हुई है, जिसे सरकार ने 'आर्थिक स्थिरीकरण' का दौर बताया था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस वृद्धि का तात्पर्य है कि देश हर दिन औसतन 26 अरब रुपए का कर्ज ले रहा है, जिसमें 19 राजपत्रित सार्वजनिक अवकाश के दिन भी शामिल हैं।