पाकिस्तान-यूएई संबंधों में गहरी दरार, इस्लामाबाद की राजनयिक चूकों से अबू धाबी नाराज़
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच दशकों पुराना रणनीतिक रिश्ता अब गंभीर संकट में है। अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद की कई राजनयिक गलतियों के चलते दोनों देशों के बीच का भरोसा टूटता नज़र आ रहा है और द्विपक्षीय साझेदारी को हुआ नुकसान अब स्थायी रूप लेता दिख रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस गिरावट के दीर्घकालिक परिणाम पाकिस्तान की पहले से कमज़ोर अर्थव्यवस्था पर और भारी पड़ सकते हैं।
दशकों की साझेदारी, अब दरकती नींव
रिपोर्ट के अनुसार, यूएई वर्षों से पाकिस्तान के सबसे भरोसेमंद खाड़ी साझेदारों में रहा है। अबू धाबी ने आर्थिक संकट के दौरान बार-बार वित्तीय सहायता दी, प्रमुख क्षेत्रों में निवेश किया और लाखों पाकिस्तानी प्रवासी कामगारों को रोज़गार दिया, जिनकी भेजी गई रकम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ रही है। सैन्य सहयोग, खुफिया समन्वय और श्रम प्रवासन ने इस साझेदारी को मज़बूत बनाए रखा और दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को 'भाईचारे वाले राज्य' बताते थे।
मुख्य घटनाक्रम जिसने रिश्तों को हिलाया
रिपोर्ट के अनुसार, तनाव की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई, जब पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एक पर हमले को दोनों पर हमला माना जाता है। इस कदम से अबू धाबी नाराज़ हो गया, क्योंकि रियाद के साथ उसकी प्रतिद्वंद्विता उस समय अपने चरम पर थी जब सऊदी समर्थित बलों ने दक्षिणी यमन में घुसपैठ की।
इसके बाद की घटनाओं ने रिश्तों को और तनावपूर्ण बनाया। कथित तौर पर यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज़ चुकाने की माँग की, जिसे इस्लामाबाद सऊदी अरब के समर्थन से ही चुका पाया। इसके बाद अमीराती अधिकारियों ने लगभग 15,000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से निकाल दिया और एतिहाद एयरवेज ने कई पाकिस्तानी कर्मचारियों को बर्खास्त करते हुए उन्हें 48 घंटों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया।
ईरान-कारक ने बढ़ाई खाई
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ खाड़ी अरब देशों के तनाव ने दोनों पक्षों के बीच दूरियाँ और बढ़ा दीं। अमीराती पक्ष का मानना है कि हालिया संघर्ष के दौरान और उसके बाद पाकिस्तान ने ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाई। वर्षों की वित्तीय सहायता के बदले अबू धाबी को इस्लामाबाद से, विशेष रूप से ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान, मज़बूत राजनयिक समर्थन की अपेक्षा थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खाड़ी अरब देशों द्वारा स्वयं ईरानी नाकाबंदी का सामना करने के बावजूद पाकिस्तान द्वारा ईरान के लिए 6 ज़मीनी मार्ग खोलने के निर्णय ने समस्या को और जटिल बना दिया। अमीराती रणनीतिक टिप्पणियाँ इस बढ़ते तनाव की गवाह हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर
मिडिल ईस्ट फोरम ने चेतावनी दी है कि संबंधों में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक गिरावट पाकिस्तान की आर्थिक कमज़ोरियों को और गहरा करेगी। यूएई न केवल पाकिस्तानी श्रमिकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है, बल्कि प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली रकम पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में अहम योगदान देती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट लंबे समय से अपेक्षित था, लेकिन अब इसके ठोस आर्थिक परिणाम सामने आने लगे हैं।
आगे की राह
फ़िलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक घटनाक्रम ने अलग-अलग द्विपक्षीय संबंधों पर सवाल खड़े किए, लेकिन ये सभी मिलकर संबंधों में गंभीर गिरावट का संकेत देते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इस्लामाबाद के लिए अबू धाबी का भरोसा फिर से जीतना एक बड़ी राजनयिक चुनौती होगी।