यूएन महासचिव पद: पनामा ने अमेरिका से लैटिन अमेरिकी उम्मीदवार का समर्थन माँगा
सारांश
मुख्य बातें
पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने 28 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से टेलीफोन पर बातचीत में आग्रह किया कि वाशिंगटन संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव के चुनाव में 'क्षेत्रीय रोटेशन' के सिद्धांत का समर्थन करे। पनामा का स्पष्ट मत है कि एंटोनियो गुटेरेस के कार्यकाल की समाप्ति के बाद यह शीर्ष पद लैटिन अमेरिका या कैरेबियन क्षेत्र के किसी उम्मीदवार को मिलना चाहिए। दोनों सरकारों द्वारा जारी बयानों के अनुसार यह वार्ता मंगलवार को हुई।
क्षेत्रीय रोटेशन का तर्क
मुलिनो ने इस बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि यूएन में शीर्ष नेतृत्व को भौगोलिक विविधता के आधार पर चुनने की अलिखित परंपरा रही है। उनके अनुसार, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं और इस बार का अवसर उनके क्षेत्र को मिलना चाहिए।
पनामा के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि अगले यूएन प्रमुख के चुनाव के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति आवश्यक है। हालाँकि किसी विशेष उम्मीदवार का नाम न पनामा ने लिया और न ही अमेरिका ने।
अमेरिका का रुख
अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की कि रूबियो और मुलिनो ने महासचिव के चुनाव पर चर्चा की, परंतु क्षेत्रीय रोटेशन के प्रस्ताव पर वाशिंगटन के स्पष्ट रुख का खुलासा नहीं किया गया। विभाग ने इस वार्ता को दोनों देशों के बीच मजबूत होती साझेदारी को पुष्ट करने वाला बताया। किसी भी सरकार ने किसी उम्मीदवार के समर्थन या किसी साझा रुख की घोषणा नहीं की।
गुटेरेस का कार्यकाल और उत्तराधिकार की तैयारी
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश गुटेरेस के उत्तराधिकारी को चुनने की तैयारी कर रहे हैं। एंटोनियो गुटेरेस का दूसरा पाँच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। गौरतलब है कि यूएन महासचिव पद पर अब तक लैटिन अमेरिका के केवल एक व्यक्ति — पेरू के जेवियर पेरेज़ डे कुएयार (1982–1991) — रह चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र का यह दावा और मजबूत होता है।
पनामा भूकंप राहत पर चर्चा
इस राजनयिक वार्ता में एक और महत्वपूर्ण विषय था — 9 अक्टूबर 2026 को पनामा में आए भूकंप के बाद चल रहे राहत और पुनर्निर्माण कार्य। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, भूकंप के 24 घंटे के भीतर ही अमेरिकी सहायता प्रभावित समुदायों तक पहुँच गई थी। इस सहायता में भोजन, पानी, संचार उपकरण, लॉजिस्टिक सहयोग और शहरी खोज एवं बचाव (सर्च-एंड-रेस्क्यू) टीमें शामिल थीं।
मुलिनो ने मानवीय सहायता और संरचनात्मक नुकसान के आकलन के लिए अमेरिकी कर्मियों को भेजने पर वाशिंगटन का आभार व्यक्त किया। रूबियो ने पुनर्निर्माण के दौरान पनामा का समर्थन जारी रखने की अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई।
व्यापक संदर्भ
इस वार्ता में दो अलग-अलग राजनयिक धाराएँ एक साथ उभरती दिखीं — एक ओर प्राकृतिक आपदा के बाद द्विपक्षीय सहयोग, और दूसरी ओर वैश्विक शासन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का बड़ा सवाल। दोनों सरकारों ने क्षेत्र में लोकतंत्र की स्थिति पर भी चर्चा की, हालाँकि किसी विशेष चिंता का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे यूएन महासचिव पद की दौड़ तेज होगी, लैटिन अमेरिका का यह दावा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आने की संभावना है।