पंचायती राज दिवस: राजीव गांधी की ऐतिहासिक देन, 32 लाख प्रतिनिधि — जयराम रमेश

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पंचायती राज दिवस: राजीव गांधी की ऐतिहासिक देन, 32 लाख प्रतिनिधि — जयराम रमेश

सारांश

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर कांग्रेस ने राजीव गांधी को 73वें संविधान संशोधन का श्रेय दिया। जयराम रमेश ने कहा कि आज 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में 15 लाख महिलाएं हैं — यह राजीव गांधी की दूरदर्शिता का नतीजा है।

Key Takeaways

  • 24 अप्रैल 1993 को 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ, जिसे कांग्रेस राजीव गांधी की ऐतिहासिक देन मानती है।
  • देश में अब 32 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिनमें 15 लाख महिलाएं शामिल हैं।
  • 1989 में 64वें संशोधन विधेयक को भाजपा के विरोध के कारण राज्यसभा में रोका गया था।
  • मनमोहन सिंह सरकार ने मई 2004 में पंचायती राज मंत्रालय बनाया और फरवरी 2006 में मनरेगा लागू की।
  • देश में 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700+ मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषदें कार्यरत हैं।
  • जयराम रमेश ने कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाना लोकसभा सीटें बढ़ाने से अधिक जरूरी है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकारों द्वारा जमीनी लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदमों को याद किया। कांग्रेस सांसद एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की नींव पूरी तरह राजीव गांधी की दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।

73वां संविधान संशोधन: एक परिवर्तनकारी पहल

24 अप्रैल 1993 को संविधान के 73वें संशोधन के लागू होने की वर्षगांठ पर जयराम रमेश ने कहा, "यह वास्तव में एक परिवर्तनकारी पहल थी, जो पूरी तरह से राजीव गांधी के आग्रह और दृढ़ता का परिणाम थी।" इस संशोधन ने संविधान में अनुच्छेद 243-ए से 243-ओ तक विस्तृत प्रावधान जोड़े, जिनका उद्देश्य पंचायतों को राजव्यवस्था की बुनियादी इकाई बनाना था।

उल्लेखनीय है कि यह संशोधन विधेयक मूल रूप से 1989 में 64वें संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया था। लोकसभा में पारित होने के बावजूद भाजपा के विरोध के कारण यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। बाद में 1993 में यह ऐतिहासिक संशोधन अंततः लागू हुआ।

महिला सशक्तिकरण की आधारशिला

जयराम रमेश ने रेखांकित किया कि राजीव गांधी की पहल के कारण ही पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की महिलाएं भी शामिल हैं।

आज की तारीख में देश की पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें से करीब 15 लाख महिलाएं हैं। यह आंकड़ा भारत को महिला राजनीतिक भागीदारी के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में खड़ा करता है।

मनमोहन सिंह सरकार की भूमिका

जयराम रमेश ने अपने एक्स (X) पोस्ट में लिखा कि डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मई 2004 में पंचायती राज मंत्रालय का गठन किया और फरवरी 2006 में ऐतिहासिक मनरेगा (MGNREGA) की शुरुआत की। इस योजना ने ग्राम पंचायतों को विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका सौंपी।

मनरेगा आज भी ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है, जो करोड़ों परिवारों को रोजगार की गारंटी देती है और पंचायतों को सीधे संसाधन उपलब्ध कराती है।

पंचायती राज ढांचा: आज की स्थिति

आज देश में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषदें कार्यरत हैं। यह विशाल लोकतांत्रिक ढांचा दुनिया की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत शासन प्रणालियों में से एक है।

जयराम रमेश ने महिला आरक्षण विधेयक की हालिया विफलता की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा, "पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाना, लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से कहीं अधिक जरूरी है।"

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह बयान ऐसे समय में आया है जब परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर राष्ट्रीय बहस जारी है। कांग्रेस का यह कदम स्पष्ट रूप से भाजपा सरकार पर जमीनी लोकतंत्र की उपेक्षा का आरोप लगाने की रणनीतिक कोशिश भी है।

आने वाले समय में पंचायती राज संस्थाओं को और अधिक वित्तीय स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकार देने की मांग जोर पकड़ सकती है, खासकर 2026 में कई राज्यों में होने वाले पंचायत चुनावों के मद्देनजर।

Point of View

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश है — जो भाजपा पर जमीनी लोकतंत्र की उपेक्षा का आरोप लगाता है। विडंबना यह है कि जिस पार्टी ने 1989 में पंचायती राज विधेयक को राज्यसभा में रोका, वह आज सत्ता में है और परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटें बढ़ाने की बात कर रही है। रमेश का यह कटाक्ष — 'पंचायतों को सशक्त बनाना, लोकसभा सीटें बढ़ाने से जरूरी है' — सीधे उस बहस को चुनौती देता है। असली सवाल यह है कि 73वें संशोधन के तीन दशक बाद भी पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता क्यों नहीं मिली — और इसकी जवाबदेही किस सरकार पर है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1993 में 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ था। इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया।
73वें संविधान संशोधन का श्रेय किसे दिया जाता है?
कांग्रेस के अनुसार 73वें संविधान संशोधन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जाता है। जयराम रमेश ने कहा कि यह उनकी दृढ़ता और आग्रह का परिणाम था।
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
वर्तमान में देश की पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें से करीब 15 लाख महिलाएं हैं। 73वें संशोधन के तहत एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
मनरेगा और पंचायती राज का क्या संबंध है?
फरवरी 2006 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लागू मनरेगा ने ग्राम पंचायतों को योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने की केंद्रीय भूमिका सौंपी। इससे पंचायतें ग्रामीण विकास की धुरी बन गईं।
देश में कितनी पंचायतें और जिला परिषदें हैं?
वर्तमान में भारत में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषदें कार्यरत हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत शासन प्रणालियों में से एक है।
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