पांवटा में राहत कार्यों के लिए विधायक निधि से 55 लाख रुपए जारी: भाजपा अध्यक्ष हितेंद्र कुमार
सारांश
Key Takeaways
- 55 लाख रुपए की राशि राहत कार्यों के लिए जारी की गई है।
- विधायक सुखराम चौधरी ने राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है।
- बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक सहायता का कार्य तेजी से चल रहा है।
- विधायक ने जनता की सेवा को अपना प्राथमिक कर्तव्य बताया है।
- आने वाले समय में विकास और जमीनी कार्य महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
सिरमौर, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के पांवटा विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से 55 लाख रुपए राहत कार्यों हेतु जारी किए गए हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष हितेंद्र कुमार ने एक प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित पांवटा क्षेत्र में राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विधायक सुखराम चौधरी द्वारा स्वीकृत इस राशि से राहत कार्यों को तेज गति मिली है।
हितेंद्र कुमार ने बताया कि क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में बाढ़ ने किसानों की फसलों और उपजाऊ भूमि को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। कुछ स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं, लेकिन विधायक ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि बांगरण क्षेत्र में गिरी नदी की बाढ़ से प्रभावित सिंचाई योजना की मरम्मत के लिए 40 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत जामनीवाला के खारा खाला में किसानों की भूमि की सुरक्षा हेतु 7.50 लाख रुपए और ग्राम पंचायत कुंडियों के अजीवाला क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित ज़मीन के संरक्षण के लिए भी 7.50 लाख रुपए जारी किए गए हैं।
विधायक सुखराम चौधरी का हवाला देते हुए हितेंद्र कुमार ने कहा कि क्षेत्र का विकास तभी संभव है जब “पांवटा का बेटा” मजबूती से खड़ा रहे। उन्होंने कहा, “मैं सेवकों का सेवक बनकर काम करूंगा। जनता की सेवा करना ही मेरा कर्तव्य है, और इसे पूरी निष्ठा से निभाता रहूंगा।”
उन्होंने कहा कि आपदा के बाद कुछ लोग विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहत राशि जारी कर जमीनी स्तर पर कार्य करने की नीति ने “काम बनाम बयानबाजी” की नई बहस को जन्म दिया है।
वर्तमान में, राहत कार्यों के बीच उठाए गए इस कदम से पांवटा की राजनीति में यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में विकास और जमीनी कार्य ही प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।