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पेपर लीक एक 'कैंसर' है, फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने: शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे

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पेपर लीक एक 'कैंसर' है, फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने: शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने पेपर लीक को देश के युवाओं के लिए 'कैंसर' करार दिया और फास्ट-ट्रैक अदालत, सख्त कानून तथा मुख्यमंत्रियों की सीधी जवाबदेही की माँग की। नीट लीक पर सीबीआई जाँच तेज़ करने और पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने की अपील की।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 29 जुलाई को मुंबई में पेपर लीक को 'कैंसर' बताया।
माँग की कि पेपर लीक पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने और आरोपियों को कड़ी सज़ा मिले।
नीट पेपर लीक मामले में CBI को जाँच तेज़ कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने का आह्वान।
जिन राज्यों में पेपर लीक हो, वहाँ मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराने की माँग।
संगरूर कोर्ट द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध वारंट मामले पर टिप्पणी से परहेज़ करते हुए कहा — वकील हलफनामे से जमानत ले सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 29 जुलाई को मुंबई में पेपर लीक की समस्या को देश के युवाओं के भविष्य के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया और माँग की कि इस पर अंकुश लगाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालत गठित की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेपर लीक करने वाले देशद्रोही हैं और उन्हें देश के किसी भी कोने में पनाह नहीं मिलनी चाहिए।

छात्रों का टूटता भरोसा

दुबे ने कहा कि जो छात्र दो वर्षों की अथक मेहनत के बाद परीक्षा की तैयारी पूरी कर लेता है, उसे जब परीक्षा से चार दिन पहले पेपर लीक की खबर मिलती है, तो उसका पूरा मनोबल टूट जाता है। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक करने वाले इस कैंसर को समाप्त करना होगा।' उनके अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों पर सीधा प्रहार है।

सख्त कानून और जवाबदेही की माँग

दुबे ने माँग की कि जिन राज्यों में पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं, वहाँ जन-आंदोलन होना चाहिए और पेपर लीक के विरुद्ध कड़े कानून बनाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी किसी राज्य में पेपर लीक हो, तो उस राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को जनता के सामने जवाब देना होगा। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि निष्पक्ष नज़रिए से इस मुद्दे को देखना होगा।

नीट पेपर लीक: सीबीआई जाँच पर दुबे का रुख

नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने कहा कि एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए ताकि आरोपियों पर शीघ्र मुकदमा चले और उन्हें ऐसी कड़ी सज़ा मिले जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक कड़ा संदेश बने। उन्होंने कहा कि सीबीआई को अपनी जाँच की गति बढ़ानी चाहिए, पूरे रैकेट का पर्दाफाश करना चाहिए और ठोस साक्ष्यों के साथ आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

संसद और राजनीतिक विवादों पर दुबे की राय

संसद की कार्यवाही पर बात करते हुए दुबे ने कहा कि सदन तभी सुचारु रूप से चलेगा, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार होंगे। उनके अनुसार, 'यह विवाद का समय नहीं, संवाद का समय है।' कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे के सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विवादों में उलझने के बजाय देश को 2026 में आगे ले जाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके शब्दों में, 'वीर सावरकर भी महान हैं और सुभाष चंद्र बोस भी — हमारे लिए दोनों सम्मानीय हैं।'

खड़गे वारंट मामले पर संयमित प्रतिक्रिया

संगरूर कोर्ट द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध वारंट जारी किए जाने की खबरों पर दुबे ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायालय में विचाराधीन मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने खड़गे की वरिष्ठता और राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि यदि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, तो उनके अधिवक्ता हलफनामा दाखिल कर जमानत की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

दुबे की यह माँग ऐसे समय में आई है जब पेपर लीक के मामले पूरे देश में राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं और छात्र संगठन सड़कों पर उतर कर जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को संसद में और तेज़ी से उठाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब तक राज्य सरकारें परीक्षा-तंत्र में संरचनात्मक सुधार नहीं करतीं। मुख्यमंत्रियों की जवाबदेही की बात तो उचित है, पर यह जवाबदेही सभी दलों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए — चुनिंदा नहीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद दुबे ने पेपर लीक पर क्या माँग की है?
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने पेपर लीक के आरोपियों पर शीघ्र मुकदमा चलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और कड़े कानून लागू करने की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस राज्य में पेपर लीक हो, वहाँ के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को सीधे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
नीट पेपर लीक मामले में दुबे ने सीबीआई से क्या अपेक्षा जताई?
दुबे ने कहा कि सीबीआई को अपनी जाँच की गति बढ़ानी चाहिए, पूरे लीक रैकेट का पर्दाफाश करना चाहिए और ठोस साक्ष्यों के साथ आरोपियों को न्यायालय के सामने पेश करना चाहिए। उनके अनुसार, सज़ा इतनी कड़ी होनी चाहिए कि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ता है?
दुबे के अनुसार, दो वर्षों की कठिन मेहनत के बाद जब किसी छात्र को परीक्षा से महज चार दिन पहले पेपर लीक की सूचना मिलती है, तो उसका मनोबल और व्यवस्था पर भरोसा दोनों टूट जाते हैं। यह लाखों मेधावी छात्रों के सपनों पर सीधा प्रहार है।
संगरूर कोर्ट के वारंट मामले पर दुबे ने क्या कहा?
आनंद दुबे ने संगरूर कोर्ट द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विरुद्ध वारंट जारी किए जाने की खबरों पर सीधी टिप्पणी से परहेज़ किया। उन्होंने कहा कि यदि खड़गे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, तो उनके अधिवक्ता हलफनामा दाखिल कर जमानत की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
वीर सावरकर और सुभाष चंद्र बोस विवाद पर दुबे का क्या मत है?
दुबे ने कहा कि ऐतिहासिक विवादों में उलझने के बजाय देश को 2026 में आगे ले जाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, वीर सावरकर और सुभाष चंद्र बोस दोनों महान राष्ट्रनायक हैं और दोनों समान सम्मान के पात्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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