पेपरलीक पर 'सरकार कोई भी हो, कार्रवाई जरूरी': सिंहदेव ने BJP के आरोपों को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने 13 अगस्त को स्पष्ट किया कि पेपरलीक के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का रुख शुरू से एकसमान रहा है — 'सरकार चाहे किसी की भी हो, गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।' रायपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन आरोपों को सिरे से नकार दिया जिनमें दावा किया गया था कि झारखंड के विरोध-प्रदर्शन में कांग्रेस ने अलग रुख अपनाया।
पेपरलीक पर कांग्रेस का रुख
सिंहदेव ने कहा, 'रुख कहाँ अलग है? दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान भी राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस युवाओं के मुद्दों के साथ है। कांग्रेस शुरुआत से ही इन मुद्दों को उठाती रही है।' उन्होंने बताया कि राहुल गांधी देश के अलग-अलग शहरों में इस विषय पर तीन बैठकें कर चुके हैं और चौथी बैठक प्रस्तावित है। उनके शब्दों में, 'कांग्रेस ने गलत को गलत ही कहा है — सरकार किसी की भी हो, पेपरलीक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'
नांदेड़ हमले पर प्रतिक्रिया
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में हुए हमले को सिंहदेव ने 'बहुत दुखद घटना' बताया। उन्होंने माँग की कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों को 'कड़ी से कड़ी सजा' दी जाए। यह घटना उस समय राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है जब देश में कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं।
खड़गे रैली के बाद 'शुद्धीकरण' पर तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए 'शुद्धीकरण' की घटना पर सिंहदेव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'शुद्धीकरण की बात विकृत मानसिकता के लोग ही कर सकते हैं।' उन्होंने खड़गे की जीवन-यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक मज़दूर के घर से निकलकर, अनेक कठिनाइयों को झेलकर जो व्यक्ति आज देश की सर्वोच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम कर रहा है, उसके प्रति ऐसी सोच रखने वाले लोग पुरानी जातिवादी मानसिकता के प्रतीक हैं। सिंहदेव ने कहा, 'मैं तो इतनी ही कामना करूँगा कि इनकी बुद्धि जागृत हो।'
FCRA बिल पर चिंता
प्रस्तावित FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) संशोधन बिल पर सिंहदेव ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि यह बिल अभी पारित नहीं हुआ है और संसदीय समिति में विचार-विमर्श के बाद ही सदन में वापस लाया जाएगा। हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि इसके मौजूदा स्वरूप में जाँच एजेंसियों को असीमित अधिकार मिल सकते हैं। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) का उदाहरण देते हुए कहा, 'आपने एक संस्था को अधिकार दे दिया कि आप किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं — लोग महीनों जेल में रहते हैं, न बेल मिलती है, न दोष सिद्ध होता है। FCRA में जो प्रावधान आ रहे हैं, वे उसी राह पर हैं।'
आगे क्या
FCRA बिल संसदीय समिति के पास विचाराधीन है और विभिन्न पक्षों की राय के बाद इसे दोबारा संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। पेपरलीक विरोध के संदर्भ में राहुल गांधी की चौथी बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।