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समस्तीपुर छेड़खानी पर पप्पू यादव का बिहार सरकार पर हमला: 'राज्य में कोई बेटी सुरक्षित नहीं'

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समस्तीपुर छेड़खानी पर पप्पू यादव का बिहार सरकार पर हमला: 'राज्य में कोई बेटी सुरक्षित नहीं'

सारांश

समस्तीपुर में नाबालिग से कथित छेड़खानी के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल बताया। उन्होंने दावा किया कि 60-70% केस दर्ज ही नहीं होते और दलित-कमज़ोर वर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।

मुख्य बातें

पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 24 सितंबर 2026 को समस्तीपुर छेड़खानी घटना के बाद बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला।
यादव का दावा — बिहार में 60-70% बलात्कार व छेड़खानी के मामले पुलिस में दर्ज ही नहीं होते।
दलित, ईबीसी, एसटी और एससी समुदाय के पीड़ित सर्वाधिक प्रभावित बताए गए।
यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की माँग की और बिहार, बंगाल, हरियाणा व असम के चुनाव रद्द करने की अपील की।
बिहार सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 24 सितंबर 2026 को समस्तीपुर में एक नाबालिग किशोरी से हुई कथित छेड़खानी की घटना को लेकर बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई और नीतीश सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर 'पूरी तरह विफल' करार दिया।

मुख्य आरोप: 'बिहार में कोई बेटी सुरक्षित नहीं'

पप्पू यादव ने कहा, 'मधेपुरा, समस्तीपुर और दरभंगा के स्कूलों को देखिए। जो सोशल मीडिया पर आ रहा है, उसे देखिए। बिहार में कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं है क्योंकि कानून व्यवस्था की हालत बेहद खराब है। आम लोगों से लेकर विभिन्न दलों के नेता भी नशाखोरी में लिप्त हैं।'

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में कोई सुरक्षित नहीं है। उनके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर भी सुरक्षा का अभाव है और 'पूरे राज्य में सिर्फ माफिया, नेता और अधिकारी ही सुरक्षित हैं।'

'2005 के बाद महा जंगलराज' — पप्पू यादव का तंज

सांसद यादव ने 2005 से पहले के तथाकथित 'जंगल राज' और मौजूदा सरकार पर तुलनात्मक निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'एक व्यक्ति कहता है कि 2005 से पहले 'जंगल राज' था, तो दूसरा कहता है कि 2005 के बाद 'महा जंगलराज' है। जब जंगल राज था तो जनता ने उन्हें हटा दिया, लेकिन 2005 के बाद जब आप सत्ता में आए, तो अब हालात उससे भी बदतर हैं।' उन्होंने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि गरीब परिवारों की बेटियाँ 'बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।'

दलित और कमज़ोर वर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित

पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों और बदमाशों द्वारा बलात्कार और छेड़खानी की घटनाओं में दलित, ईबीसी, एसटी और एससी समुदाय के लोग सर्वाधिक पीड़ित हैं। उनका दावा है कि कथित तौर पर 60 से 70 प्रतिशत मामले तो पुलिस में दर्ज ही नहीं होते। यह आँकड़ा उन्होंने अपने दावे के आधार पर प्रस्तुत किया; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्टों में भी बिहार में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की कम रिपोर्टिंग की प्रवृत्ति को रेखांकित किया गया है, हालाँकि 60-70% के दावे की अधिकृत पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

चुनाव आयोग पर विस्फोटक बयान

समस्तीपुर की घटना के अलावा चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चल रहे विवाद पर भी पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त को एक मिनट भी पद पर रहने का अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री को तुरंत सदन बुलाकर महाभियोग की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। यह देशद्रोह और लोकतंत्र की हत्या है।'

उन्होंने यह भी माँग की कि बिहार, बंगाल, हरियाणा और असम के चुनाव रद्द होने चाहिए और विपक्ष को तब तक यह लड़ाई जारी रखनी चाहिए जब तक चुनाव आयोग को भंग न कर दिया जाए। बिहार सरकार की तरफ से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

समस्तीपुर छेड़खानी मामले में पुलिस की कार्रवाई और यादव के आरोपों के मद्देनज़र विपक्ष का बिहार सरकार पर दबाव और बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '60-70% केस दर्ज नहीं होते' जैसे दावों के लिए स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है — बिना उसके ये आँकड़े भावनात्मक तो हैं, पर नीतिगत बहस के लिए अपर्याप्त। असली सवाल यह है कि समस्तीपुर जैसी घटनाओं पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही कहाँ है। चुनाव आयोग पर महाभियोग की माँग को एक अलग राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देखना होगा — इससे महिला सुरक्षा के मूल मुद्दे की धार कमज़ोर होने का खतरा है। बिहार में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की कम रिपोर्टिंग एक संरचनात्मक समस्या है, जो किसी एक पार्टी या सरकार की नहीं, बल्कि दशकों की प्रशासनिक विफलता की कहानी कहती है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव ने बिहार सरकार पर क्यों हमला बोला?
समस्तीपुर में एक नाबालिग किशोरी से कथित छेड़खानी की घटना के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को 'बेहद खराब' बताते हुए सरकार को विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं है।
पप्पू यादव के 60-70% केस दर्ज न होने के दावे का क्या आधार है?
यह दावा पप्पू यादव ने अपने बयान में किया है; इसकी स्वतंत्र या सरकारी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। हालाँकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्टें भी बिहार में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की कम रिपोर्टिंग की ओर संकेत करती हैं।
पप्पू यादव ने चुनाव आयोग पर क्या माँग रखी?
यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की माँग की। उन्होंने बिहार, बंगाल, हरियाणा और असम के चुनाव रद्द करने की भी अपील की और इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया।
बिहार में कौन से समुदाय महिला अपराधों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
पप्पू यादव के अनुसार दलित, ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), एसटी (अनुसूचित जनजाति) और एससी (अनुसूचित जाति) समुदाय के लोग सबसे अधिक पीड़ित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समुदायों के मामले अक्सर पुलिस में दर्ज ही नहीं होते।
समस्तीपुर छेड़खानी मामले में सरकार ने क्या कहा?
अभी तक बिहार सरकार की ओर से इस घटना और पप्पू यादव के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले में पुलिस की कार्रवाई की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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