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शिक्षा में सुधार से ही स्थायी परिवर्तन संभव: गोविंद देव गिरि महाराज का कोलकाता में आह्वान

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शिक्षा में सुधार से ही स्थायी परिवर्तन संभव: गोविंद देव गिरि महाराज का कोलकाता में आह्वान

सारांश

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने कोलकाता में स्कूली इतिहास पाठ्यक्रम और मुगल काल की प्रस्तुति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा — शिक्षा में सुधार के बिना स्थायी परिवर्तन असंभव है, और यह विचार PM मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

मुख्य बातें

गोविंद देव गिरि महाराज ने 7 जून 2026 को कोलकाता में स्कूली इतिहास पाठ्यक्रम में सुधार का आह्वान किया।
उन्होंने मुगल काल के इतिहास की प्रस्तुति को संतुलित और तथ्यपरक बनाने की माँग की।
महाराज ने कहा कि ये विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक पहचान पुनर्जीवित करने और स्थान-नामों पर पुनर्विचार का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही किसी राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन का एकमात्र माध्यम है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने 7 जून 2026 को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि देश में स्थायी सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूल सुधार अनिवार्य है। उन्होंने स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम में मुगल काल की प्रस्तुति पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि इतिहास को संतुलित और तथ्यपरक ढंग से पढ़ाया जाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दरकार

गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसे तत्व समाहित हो गए हैं जो उनके अनुसार 'गलत' हैं और जिन पर पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ये विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और निर्देशों के अनुरूप व्यक्त कर रहे हैं। उनके अनुसार, शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके ज़रिए किसी भी राष्ट्र और समाज में दीर्घकालिक परिवर्तन लाया जा सकता है।

सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक संदर्भ

महाराज ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे प्रतीकों और स्मारकों का संरक्षण तथा निर्माण होना चाहिए जो स्थानीय संस्कृति और परंपरा को प्रतिबिंबित करते हों। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब देशभर में इतिहास की पाठ्यपुस्तकों की विषय-वस्तु को लेकर व्यापक बहस जारी है।

स्थान-नामों पर पुनर्विचार का सुझाव

गोविंद देव गिरि महाराज ने सुझाव दिया कि कई स्थानों के नामों और ऐतिहासिक संदर्भों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए — विशेषकर उन नामों पर जो उनके अनुसार विदेशी आक्रमणों या शासन से जुड़े हैं। उनका मत है कि इस तरह के बदलावों से नागरिकों में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, धर्म और परंपराओं में निहित है और इन्हें सुदृढ़ करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक चेतना बढ़ाने की दिशा में हो रहे प्रयासों की सराहना भी की।

उपस्थित जनों से अपील

महाराज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के प्रति सजग रहें और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का इस तरह का सार्वजनिक संबोधन शिक्षा नीति की बहस में एक नया आयाम जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सांगठनिक एजेंडे का हिस्सा बन रही है। आलोचकों का कहना है कि इतिहास-लेखन में 'संतुलन' की परिभाषा पर आम सहमति बनाए बिना इस तरह के सुझाव विभाजनकारी भी हो सकते हैं। असली प्रश्न यह है कि 'सही इतिहास' का निर्धारण कौन करेगा — शैक्षणिक विशेषज्ञ या धार्मिक-सांस्कृतिक संगठन।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोविंद देव गिरि महाराज ने शिक्षा सुधार पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मौजूद 'गलत तत्वों' की पुनः समीक्षा कर उन्हें हटाने की ज़रूरत है और इतिहास को संतुलित तरीके से पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा में सुधार के बिना समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है।
गोविंद देव गिरि महाराज कौन हैं?
वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की देखरेख करने वाले इस ट्रस्ट में वे एक प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक व्यक्तित्व हैं।
मुगल काल के इतिहास को लेकर उनकी क्या आपत्ति है?
महाराज ने कथित तौर पर कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में मुगल काल के इतिहास की प्रस्तुति एकपक्षीय है और इसे संतुलित व तथ्यपरक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे शिक्षा प्रणाली में मौजूद उन 'त्रुटियों' में गिना जिन पर पुनर्विचार आवश्यक है।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में उन्होंने क्या सुझाव दिए?
उन्होंने पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने, स्थानीय परंपराओं से जुड़े स्मारकों के संरक्षण और विदेशी शासन से जुड़े स्थान-नामों पर पुनर्विचार का सुझाव दिया।
क्या यह संबोधन सरकारी नीति का हिस्सा है?
महाराज ने स्वयं कहा कि वे ये विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और निर्देशों के अनुरूप व्यक्त कर रहे हैं। हालाँकि यह एक सार्वजनिक संबोधन था, न कि कोई आधिकारिक सरकारी घोषणा।
राष्ट्र प्रेस
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