तृणमूल बिलबोर्ड विवाद: सांसद सौगत राय बोले — पार्टी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ करना गैरकानूनी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने 28 अगस्त को कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए तृणमूल बिलबोर्ड विवाद, नेपाल बाढ़ और अन्य मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में जबरन प्रवेश कर बिलबोर्ड तोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी है और इस मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
बिलबोर्ड विवाद और कानूनी लड़ाई
तृणमूल कांग्रेस के बिलबोर्ड तोड़े जाने और अभिषेक बनर्जी सहित अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के मामले में सांसद राय ने कहा, 'इस मामले को लेकर हमने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, वहां अपना पक्ष रखेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन के समावेश से ठीक एक दिन पहले इस तरह की तोड़फोड़ करना पार्टी को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित कोशिश है। राय के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया।
नेपाल बाढ़: भारतीय नागरिकों की चिंता
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर सांसद राय ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाढ़ में हुई मौतों की सटीक संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है और बंगाल के 300 से अधिक लोग लापता हैं। राय ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अधिकतम राहत पहुंचाए और स्वयंसेवी संगठनों (NGO) को नेपाल में काम करने की अनुमति दी जाए।
जेन-जी और भाजपा पर राय का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम माधव के इस दावे पर कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जेन-जी मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है, सांसद राय ने असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'यह बात गलत है, क्योंकि केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ पूरे देश में जेन-जी ने विरोध-प्रदर्शन किया है।'
कोलकाता होटल अग्निकांड पर पहले की प्रतिक्रिया
इससे पहले कोलकाता में हुए होटल अग्निकांड पर राय ने इसे 'बेहद दुखद और दर्दनाक घटना' बताया था, जिसमें नौ लोगों की जान चली गई। उन्होंने इसे फायर डिपार्टमेंट की लापरवाही का संकेत बताते हुए सरकार से मामले की जांच की मांग की थी।
झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर रुख
झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने के मामले में राय ने कहा था कि उच्च न्यायालय को अपना निर्णय सुनाने का पूर्ण अधिकार है और राज्य सरकार को उसके निर्देशों का पालन करना होगा। उन्होंने इस फैसले को सकारात्मक बताया। आने वाले दिनों में बिलबोर्ड विवाद में हाई कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।