मेकेदातु बांध पर पीएमके की चेतावनी: कावेरी जल अधिकार खतरे में, तमिलनाडु सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने 30 अगस्त 2026 को तमिलनाडु सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि मेकेदातु बांध परियोजना को समय रहते नहीं रोका गया, तो राज्य कावेरी नदी पर अपने दशकों पुराने जल अधिकार गँवा सकता है। यह बयान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की उस घोषणा के तत्काल बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बांध निर्माण की मंजूरी के लिए जल्द ही केंद्र सरकार से संपर्क करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने हाल ही में कहा कि मेकेदातु बांध से कर्नाटक के किसानों को उसी तरह लाभ मिलेगा जैसे कृष्णराज सागर बांध से मिला था। उन्होंने एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए — जिसे उन्होंने कर्नाटक के पक्ष में बताया — कहा कि राज्य सरकार केंद्र से निर्माण की अनुमति माँगेगी और इस दिशा में प्रयास तेज किए जाएँगे।
डॉ. अंबुमणि ने इस बयान को 'निंदनीय' करार दिया, खासकर तब जब तमिलनाडु के नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से इस परियोजना का व्यापक विरोध जारी है।
कर्नाटक के रुख में बड़ा बदलाव
पीएमके नेता ने तर्क दिया कि शिवकुमार के ताजा बयान ने कर्नाटक के उस पुराने आश्वासन की पोल खोल दी है, जिसमें कहा गया था कि मेकेदातु परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति के लिए है और सिंचाई हेतु जलाशय के पानी का उपयोग नहीं किया जाएगा।
अंबुमणि के अनुसार, किसानों को लाभ का दावा करके शिवकुमार ने परोक्ष रूप से स्वीकार किया है कि जलाशय में संग्रहीत पानी सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में दर्ज उद्देश्यों से सीधे विरोधाभासी है, और यह अपने आप में इस परियोजना को रद्द करने का पर्याप्त आधार है।
डूब क्षेत्र पर विवाद
अंबुमणि ने प्रस्तावित जलाशय के आकार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। जहाँ परियोजना रिपोर्ट में डूब क्षेत्र का अनुमान 5,000 हेक्टेयर (लगभग 12,500 एकड़) लगाया गया था, वहीं मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इसे 5,400 हेक्टेयर (लगभग 13,500 एकड़) बताया। पीएमके नेता ने दावा किया कि इस बड़े क्षेत्र के कारण कर्नाटक प्रस्तावित 67 टीएमसी से अधिक पानी संग्रहीत कर सकता है, जिससे तमिलनाडु को मिलने वाले कावेरी जल का प्रवाह और घट सकता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बड़े जलाशय से आस-पास के जंगलों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचने की आशंका है।
तमिलनाडु सरकार से अपील
डॉ. अंबुमणि ने तमिलनाडु सरकार से माँग की कि वह कर्नाटक के इस ताजा रुख को बिना देरी किए केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखे। उन्होंने कहा कि राज्य को हर उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक रास्ते का इस्तेमाल करते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ने से रोकना चाहिए।
गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और सर्वोच्च न्यायालय तथा कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं। यह नया घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में जल संकट गहराता जा रहा है और नदी जल बँटवारे को लेकर अंतर-राज्यीय तनाव बढ़ रहे हैं।
यदि मेकेदातु परियोजना को केंद्रीय मंजूरी मिलती है, तो यह कावेरी जल बँटवारे की मौजूदा व्यवस्था को बुनियादी रूप से प्रभावित कर सकती है — और तमिलनाडु के लिए अगली कानूनी लड़ाई की पटकथा अभी से लिखी जा रही है।