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पीडीपी का मोदी के 4399 दिन पर सवाल: अल्पसंख्यक व्यवहार और पड़ोसी संबंध ही असली कसौटी

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पीडीपी का मोदी के 4399 दिन पर सवाल: अल्पसंख्यक व्यवहार और पड़ोसी संबंध ही असली कसौटी

सारांश

पीडीपी प्रवक्ता सैयद ताजमुल ने मोदी के 4,399 दिन के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नेतृत्व की असली परख अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार, पड़ोसी देशों से संबंध और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संचालन में होती है — विकास के आँकड़ों से नहीं।

मुख्य बातें

पीडीपी प्रवक्ता सैयद ताजमुल ने 10 जून 2025 को श्रीनगर में PM मोदी के 4,399 दिन के कार्यकाल पर प्रतिक्रिया दी।
ताजमुल के अनुसार नेतृत्व की असली परीक्षा अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार और पड़ोसी देशों से संबंधों में होती है।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए हर नेता के अलग प्रभाव को स्वीकार किया।
पश्चिम एशिया और उपमहाद्वीप के संदर्भ में भारत के मुस्लिम समुदाय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी कसौटी बताया।
विकास के साथ-साथ सामाजिक समावेश और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने को सरकार की असली परीक्षा कहा।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता सैयद ताजमुल ने 10 जून 2025 को श्रीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4,399 दिन के कार्यकाल का मूल्यांकन करते हुए कहा कि किसी भी नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में होती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मोदी सरकार के कार्यकाल की विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा समीक्षा की जा रही है।

नेतृत्व की कसौटी क्या होती है

ताजमुल ने कहा कि किसी भी देश के प्रधानमंत्री की असली परख इस बात से होती है कि वह देश की राजनीतिक संरचना को किस तरह मजबूत करता है, अल्पसंख्यक समुदायों के साथ कैसा व्यवहार रखता है और प्रशासनिक व्यवस्था का उपयोग किस प्रकार करता है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं के परिणाम भी किसी नेतृत्व की कार्यशैली को परिभाषित करते हैं।

उपमहाद्वीप में नेतृत्व की ऐतिहासिक परंपरा

पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि उपमहाद्वीप में ऐतिहासिक रूप से यह परंपरा रही है कि यहाँ के नेतृत्व का कार्यकाल लंबी अवधि तक चलता है। उन्होंने कहा कि चाहे भारत हो या उसके पड़ोसी देश, राजनीतिक नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वह क्षेत्रीय संबंधों को किस तरह संभालता है और क्षेत्रीय स्थिरता में किस स्तर तक योगदान देता है।

मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन

ताजमुल ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई स्तरों पर रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें इतिहास में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नेता का अपना अलग प्रभाव और योगदान रहा है।

मुस्लिम समुदाय और अंतरराष्ट्रीय संबंध

ताजमुल ने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत का नेतृत्व मुस्लिम समुदाय के साथ किस तरह के संबंध रखता है — न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी, विशेषकर पश्चिम एशिया और उपमहाद्वीप के संदर्भ में। उनके अनुसार, किसी भी प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह देश के सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में कितना सफल होता है।

विकास बनाम समावेश

ताजमुल ने कहा कि जीडीपी वृद्धि, आर्थिक नीतियाँ और विश्व बैंक तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे संस्थानों के साथ तालमेल हर सरकार के प्रमुख लक्ष्य होते हैं। लेकिन उन्होंने जोर दिया कि किसी भी सरकार की असली परीक्षा यह है कि वह देश के विभिन्न समुदायों को किस हद तक समान रूप से साथ लेकर चलती है और एक 'पिता तुल्य' भूमिका निभाते हुए सभी नागरिकों की आवश्यकताओं को संतुलित करती है। यह बयान आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पीडीपी की स्थिति और केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस को और तेज कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक ज़मीन पर सीधा निशाना है — जहाँ अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पीडीपी केंद्र सरकार के साथ टकराव की मुद्रा में है। 'अल्पसंख्यक व्यवहार' और 'पश्चिम एशिया संबंध' को एक साथ जोड़ना यह संकेत देता है कि पार्टी घरेलू और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को महज़ विपक्षी आलोचना के रूप में पेश करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पीडीपी के पास इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस तथ्यात्मक आधार है — जो इस बयान में अनुपस्थित है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीडीपी प्रवक्ता सैयद ताजमुल ने मोदी के कार्यकाल पर क्या कहा?
सैयद ताजमुल ने कहा कि PM मोदी के 4,399 दिन के कार्यकाल का मूल्यांकन अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार, पड़ोसी देशों से संबंध और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संचालन के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने माना कि मोदी ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन सामाजिक समावेश को असली कसौटी बताया।
पीडीपी के अनुसार नेतृत्व की असली परीक्षा क्या होती है?
पीडीपी के अनुसार किसी भी नेतृत्व की असली परीक्षा राजनीतिक संरचना को मजबूत करने, अल्पसंख्यकों के साथ समान व्यवहार, पड़ोसी देशों से संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान से होती है। केवल जीडीपी वृद्धि या आर्थिक आँकड़े पर्याप्त नहीं माने जाते।
ताजमुल ने पश्चिम एशिया का उल्लेख क्यों किया?
ताजमुल ने कहा कि भारत के नेतृत्व की विश्वसनीयता मुस्लिम समुदाय के साथ संबंधों पर भी निर्भर करती है — न केवल देश के भीतर, बल्कि पश्चिम एशिया और उपमहाद्वीप के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में भी। यह टिप्पणी भारत की विदेश नीति और घरेलू अल्पसंख्यक नीति दोनों पर एक साथ सवाल उठाती है।
पीडीपी ने नेहरू और वाजपेयी का उल्लेख किस संदर्भ में किया?
ताजमुल ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख यह बताने के लिए किया कि प्रत्येक नेता का अपना अलग प्रभाव और योगदान होता है। इसके ज़रिए उन्होंने मोदी के कार्यकाल को एक व्यापक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखने की कोशिश की।
यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पीडीपी जम्मू-कश्मीर की प्रमुख विपक्षी पार्टियों में से एक है और अनुच्छेद 370 हटने के बाद से केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचक रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंधों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस तेज है।
राष्ट्र प्रेस
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