मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड: 4398 दिन पूरे, भाजपा नेताओं ने बताया ऐतिहासिक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर पहुँचते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। 9 जून को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में नेताओं ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। BJP नेता दिनेश शर्मा के अनुसार, मोदी ने 4,398 दिनों तक निरंतर शासन कर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी की, और 10 जून को यह रिकॉर्ड टूटकर उनके नाम होने की बात कही गई।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सबसे अधिक समय तक नरेंद्र मोदी का स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री के रूप में बने रहना गर्व की बात है। उन्होंने दावा किया कि मोदी के नेतृत्व में न केवल विकसित भारत बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण भी हो रहा है। मौर्य ने कहा कि लोगों के जीवन में आने वाले संकटों का समाधान इस कार्यकाल में किया गया है।
BJP सांसदों की प्रतिक्रिया
BJP के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2014 से बिना एक दिन का अवकाश लिए निरंतर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि मोदी की कर्मठता, योग्यता और निरंतरता ही उनके इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड का आधार है। शर्मा के अनुसार, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने एक भी दिन का अवकाश नहीं लिया था।
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि आज देश की जनता केंद्र सरकार पर पूरा विश्वास करती है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने अपनी कार्यशैली के तहत यह सुनिश्चित किया है कि किसी के भी हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। पाल ने कहा कि मोदी के अथक परिश्रम का परिणाम है कि आज चौतरफा विकास की बयार बह रही है।
रिकॉर्ड का ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1947 से 1964 तक लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद संभाला था। यह ऐसे समय में आया है जब मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में हैं और 2024 के आम चुनाव में लगातार तीसरी बार जनता का जनादेश हासिल किया। BJP नेताओं के अनुसार, यह निरंतरता देश की जनता के विश्वास का प्रमाण है।
आगे की दिशा
भाजपा नेताओं ने इस अवसर को पार्टी और सरकार के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत बताया है। नेताओं का कहना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह कार्यकाल निर्णायक साबित होगा। हालाँकि, विपक्ष की ओर से इस मौके पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।