7 नवंबर 2026
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जीएनए बिजली खरीद विवाद: पिनाराई विजयन का सतीशन पर KSEB और नियामक आयोग को नजरअंदाज करने का आरोप

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जीएनए बिजली खरीद विवाद: पिनाराई विजयन का सतीशन पर KSEB और नियामक आयोग को नजरअंदाज करने का आरोप

सारांश

केरल में विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद सौदे में KSEB, विद्युत नियामक आयोग और विभागीय मंत्री की राय को दरकिनार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस एकतरफे फैसले से उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ा है और पूरी फाइल सार्वजनिक की जानी चाहिए।

मुख्य बातें

पिनाराई विजयन ने 7 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते में तय प्रक्रियाएँ दरकिनार करने का आरोप लगाया।
KSEB और राज्य विद्युत नियामक आयोग ने कथित तौर पर जीएनए सौदे पर आपत्तियाँ दर्ज की थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने का KSEB प्रस्ताव — जिसकी तकनीकी व वित्तीय जाँच पूरी हो चुकी थी — ठुकरा दिया गया।
नियामक आयोग ने कथित तौर पर कहा था कि 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ऊँची दरों पर बिजली खरीद की जरूरत नहीं।
विपक्ष ने माँग की है कि KSEB के तत्कालीन MD राजामाणिकम की पूरी फाइल और संबंधित पत्र सार्वजनिक किए जाएँ।

केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने 7 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर गंभीर आरोप लगाए कि उन्होंने जीएनए बिजली खरीद समझौते को मंजूरी देने में केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) और राज्य विद्युत नियामक आयोग के निर्णयों को दरकिनार किया। विजयन के अनुसार, इस एकतरफे फैसले से KSEB और बिजली उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ा है।

मुख्य आरोप और विवाद का स्वरूप

विजयन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सतीशन ने तय प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए जीएनए के साथ बिजली खरीद समझौते को एकतरफा आगे बढ़ाया। उनका कहना है कि इस विवादित सौदे से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री जाँच से बचने के लिए भ्रम और अस्पष्टता पैदा कर रहे हैं।

विजयन ने यह भी कहा कि सतीशन ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने सामने रखी गई फाइल के आधार पर अंतिम फैसला लिया। विपक्षी नेता ने सवाल उठाया कि जब हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने के KSEB के प्रस्ताव की तकनीकी और वित्तीय जाँच पूरी हो चुकी थी, तो उस प्रस्ताव को क्यों अस्वीकार किया गया।

हिमाचल प्रदेश प्रस्ताव को दरकिनार करने का सवाल

विजयन के अनुसार, विभागीय मंत्री ने भी आधिकारिक स्तर पर हुई चर्चा के बाद हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने के पक्ष में अपनी राय दर्ज की थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने KSEB, नियामक आयोग और विभागीय मंत्री — तीनों की राय को अनदेखा करते हुए जीएनए समझौते को प्राथमिकता दी। उन्होंने पूछा, "मुख्यमंत्री ने किस कानूनी या अन्य आधार पर जीएनए के प्रस्ताव को स्वीकार करने का फैसला लिया?"

नियामक आयोग की भूमिका और वित्तीय नुकसान

विजयन ने यह स्पष्ट करने की माँग की कि क्या राज्य विद्युत नियामक आयोग ने यह कहा था कि 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ऊँची दरों पर बिजली खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अगर आयोग के निष्कर्ष गलत थे, तो सरकार ने इस पर क्या कानूनी कार्रवाई की।

विपक्षी नेता के अनुसार, KSEB ने सरकार को सचेत किया था कि जीएनए के प्रस्ताव से भारी वित्तीय नुकसान होगा। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) ने इस विषय पर कोई विस्तृत जाँच रिपोर्ट सौंपी थी।

फाइल सार्वजनिक करने की माँग

विजयन ने यह भी सवाल उठाया कि KSEB के तत्कालीन प्रबंध निदेशक राजामाणिकम के नोट से चुनिंदा पंक्तियाँ उद्धृत करने भर से बोर्ड की आपत्तियाँ खारिज नहीं की जा सकतीं। उन्होंने माँग की कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो पूरी फाइल और सरकार को मिला संबंधित पत्र सार्वजनिक किया जाए।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में बिजली आपूर्ति और खरीद की पारदर्शिता पहले से ही बहस का विषय रही है। विपक्ष के इन सवालों के बाद सरकार पर पूरे दस्तावेज़ सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में विधानसभा या संसदीय समिति में इस मुद्दे के और गरमाने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह केरल में कार्यकारी शक्ति की सीमाओं पर एक बड़ा सवाल उठाता है — क्या मुख्यमंत्री कार्यालय KSEB जैसे तकनीकी निकायों और स्वतंत्र नियामकों की सिफारिशों को बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के रद्द कर सकता है? विजयन का यह सवाल — कि हिमाचल प्रदेश का तकनीकी रूप से सत्यापित प्रस्ताव क्यों छोड़ा गया — मुख्यधारा की कवरेज में अपेक्षित ध्यान नहीं पा रहा। पारदर्शिता की असली कसौटी यह है कि क्या सरकार पूरी फाइल सार्वजनिक करने को तैयार होगी, या चुनिंदा उद्धरणों से काम चलाने की कोशिश जारी रहेगी।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएनए बिजली खरीद समझौता विवाद क्या है?
केरल सरकार ने जीएनए कंपनी के साथ बिजली खरीद का समझौता किया, जिस पर विपक्ष का आरोप है कि इसे KSEB और राज्य विद्युत नियामक आयोग की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए मंजूरी दी गई। विपक्षी नेता पिनाराई विजयन के अनुसार, इस सौदे से उपभोक्ताओं और KSEB पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ा है।
पिनाराई विजयन ने CM सतीशन पर क्या आरोप लगाए?
विजयन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सतीशन ने KSEB, राज्य विद्युत नियामक आयोग और विभागीय मंत्री की राय को दरकिनार करते हुए एकतरफे ढंग से जीएनए सौदे को मंजूरी दी। उन्होंने यह भी कहा कि सतीशन ने खुद माना है कि उन्होंने फाइल देखकर अंतिम फैसला लिया।
हिमाचल प्रदेश का प्रस्ताव क्यों अहम है?
KSEB ने हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने का प्रस्ताव रखा था, जिसकी तकनीकी और वित्तीय जाँच पूरी हो चुकी थी और विभागीय मंत्री ने भी इसके पक्ष में राय दर्ज की थी। विपक्ष का सवाल है कि इस सत्यापित प्रस्ताव को दरकिनार कर जीएनए को क्यों प्राथमिकता दी गई।
राज्य विद्युत नियामक आयोग की क्या भूमिका रही?
विजयन के अनुसार, नियामक आयोग ने यह राय दी थी कि 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ऊँची दरों पर बिजली खरीदने की जरूरत नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि इस राय को भी नजरअंदाज किया गया और सरकार ने इस पर कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की।
विपक्ष ने सरकार से क्या माँग की है?
विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने माँग की है कि जीएनए सौदे से जुड़ी पूरी फाइल और सरकार को मिला संबंधित पत्र सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी पूछा है कि KSEB के तत्कालीन MD राजामाणिकम के नोट की चुनिंदा पंक्तियाँ उद्धृत करने भर से बोर्ड की आपत्तियाँ कैसे खारिज हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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