10 अगस्त 2026
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पीएम किसान सम्मान निधि से कठुआ की सरथल घाटी में बदली किसानों की किस्मत, पंजाब तक पहुँच रही फसल

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पीएम किसान सम्मान निधि से कठुआ की सरथल घाटी में बदली किसानों की किस्मत, पंजाब तक पहुँच रही फसल

सारांश

सरथल घाटी के किसान अब सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि पंजाब की मंडियों के लिए उगा रहे हैं — और इसकी वजह है हर चार महीने में खाते में आने वाली ₹2,000 की किश्त। पीएम-किसान ने कर्ज की जंजीर तोड़ी और कठुआ के पहाड़ी किसानों को व्यावसायिक खेती की राह दिखाई।

मुख्य बातें

कठुआ जिले की सरथल घाटी के किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना की मदद से व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से जुड़े।
हर चार महीने में ₹2,000 की किश्त सीधे बैंक खाते में — बीज, खाद और परिवहन खर्च इसी से निकलता है।
तहसील बानी के किसान प्रीतम सिंह ने आलू की फसल पंजाब और पूरे जम्मू-कश्मीर में सप्लाई की।
कृषि विभाग उन्नत बीज और तकनीकी प्रशिक्षण भी दे रहा है, जिससे पैदावार में उल्लेखनीय सुधार आया।
आलू, मटर, गोभी और मौसमी सब्जियाँ अब सरथल घाटी की व्यावसायिक पहचान बन रही हैं।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की सरथल घाटी के छोटे किसान अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की बदौलत व्यावसायिक खेती की राह पर चल पड़े हैं। सीधे बैंक खाते में आने वाली किश्तों ने उन्हें बीज, खाद और परिवहन के लिए कर्ज लेने की मजबूरी से मुक्त किया है, और अब उनकी उपज पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश की मंडियों तक पहुँच रही है।

सरथल घाटी में बदलाव की कहानी

पहाड़ी इलाके में बसी सरथल घाटी में पहले अधिकांश किसान केवल अपने परिवार की जरूरत भर के लिए फसल उगाते थे। पीएम-किसान योजना के तहत हर चार महीने में खाते में आने वाली ₹2,000 की किश्त ने इस तस्वीर को बदल दिया है। अब घाटी के कई किसान आलू, मटर, गोभी और अन्य मौसमी सब्जियों का व्यावसायिक उत्पादन कर रहे हैं, जो इस इलाके की नई पहचान बन गई हैं।

किसानों के अनुसार, बीज, खाद और सिंचाई के लिए पूँजी जुटाना पहले सबसे बड़ी बाधा थी। समय पर किश्त मिलने से अब वे बिना कर्ज लिए खेती में निवेश कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में इजाफा हुआ है।

किसान प्रीतम सिंह की सफलता

तहसील बानी के किसान प्रीतम सिंह ने बताया, 'सबसे पहले मैं प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ कि उन्होंने हमारे खातों में पीएम किसान का पैसा भेजा है। हम जैसे छोटे किसानों के लिए यह बहुत फायदेमंद है। सरथल में हमने आलू की खेती की है, और हम इसे पूरे जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पंजाब में भी सप्लाई कर रहे हैं।'

प्रीतम सिंह ने आगे बताया कि योजना की राशि से उन्होंने उन्नत बीज और खाद खरीदे। कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने पैदावार को पहले के मुकाबले काफी बेहतर बनाया। उन्होंने दूसरे छोटे किसानों से भी अपील की — 'मैं दूसरे छोटे किसानों से भी खेती पर ध्यान देने की अपील करता हूँ, क्योंकि इससे अच्छी आमदनी होती है। हम कृषि विभाग से मिले अच्छे बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमें बेहतर पैदावार मिल रही है।'

आम जनता पर असर

किसानों का कहना है कि हर चार महीने में मिलने वाली ₹2,000 की किश्त से वे ट्रैक्टर का किराया, मजदूरी और परिवहन का खर्च निकाल लेते हैं। इससे फसल सही समय पर मंडी तक पहुँचती है और नुकसान कम होता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पहाड़ी इलाकों में परिवहन लागत मैदानी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक होती है।

सरकार और विभाग की भूमिका

कृषि विभाग के अधिकारी भी सरथल घाटी में आए बदलाव से संतुष्ट हैं। उनके अनुसार, पीएम-किसान के साथ-साथ सरकार बीज और प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है, जिससे किसानों को नई तकनीक अपनाने में सहायता मिल रही है। यह दोहरा सहयोग — वित्तीय और तकनीकी — घाटी की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि विकास की रफ्तार मैदानी राज्यों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है। सरथल घाटी का यह उदाहरण दर्शाता है कि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण और तकनीकी सहयोग का संयोजन दूरदराज के किसानों को बाजार से जोड़ने में कारगर हो सकता है। आने वाले सीजन में यदि यह रुझान बना रहा, तो सरथल घाटी क्षेत्रीय सब्जी आपूर्ति की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे नीतिगत सफलता का प्रमाण मानने से पहले कुछ सवाल जरूरी हैं। ₹2,000 प्रति चार महीने की किश्त — यानी सालाना ₹6,000 — व्यावसायिक खेती की लागत के लिहाज से बेहद सीमित है; असली बदलाव शायद कृषि विभाग के बीज और प्रशिक्षण कार्यक्रम से आया है, जिसका श्रेय अलग से मिलना चाहिए। यह भी देखना होगा कि मंडी तक पहुँच और उचित मूल्य की निरंतरता सुनिश्चित हो रही है या नहीं — पहाड़ी इलाकों में बिचौलियों की भूमिका अक्सर किसान की आमदनी को सीमित कर देती है। एक किसान की सफलता की कहानी नीति की व्यापक सफलता नहीं होती; घाटी के समग्र आँकड़े सार्वजनिक होने चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम किसान सम्मान निधि योजना क्या है और इसका लाभ कैसे मिलता है?
पीएम किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत पात्र किसानों के बैंक खाते में हर चार महीने में ₹2,000 की किश्त सीधे भेजी जाती है, यानी सालाना ₹6,000। यह राशि बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों के लिए उपयोग की जा सकती है।
सरथल घाटी के किसानों को इस योजना से क्या फायदा हुआ?
सरथल घाटी के किसान अब बिना कर्ज लिए खेती में निवेश कर पा रहे हैं। किश्त की राशि से उन्नत बीज, खाद और परिवहन का खर्च निकलता है, जिससे फसल समय पर मंडी तक पहुँचती है और आमदनी बढ़ी है।
कठुआ के किसान अपनी फसल कहाँ-कहाँ बेच रहे हैं?
कठुआ जिले की सरथल घाटी के किसान अब स्थानीय मंडियों के अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश की मंडियों तक आलू और सब्जियाँ आपूर्ति कर रहे हैं। तहसील बानी के किसान प्रीतम सिंह ने बताया कि उनकी फसल पूरे जम्मू-कश्मीर और पंजाब में जा रही है।
सरथल घाटी में कौन-सी फसलें मुख्य रूप से उगाई जा रही हैं?
सरथल घाटी में आलू, मटर, गोभी और अन्य मौसमी सब्जियाँ प्रमुख रूप से उगाई जा रही हैं। कृषि विभाग से मिले उन्नत बीजों और तकनीकी मार्गदर्शन से पैदावार में उल्लेखनीय सुधार आया है।
क्या सरकार केवल पैसा दे रही है या अन्य सहायता भी मिल रही है?
पीएम-किसान की वित्तीय सहायता के साथ-साथ कृषि विभाग उन्नत बीज और तकनीकी प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रहा है। इस दोहरे सहयोग से किसानों को नई कृषि तकनीक अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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