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'नारी शक्ति' के लिए पीएम मोदी का नया पत्र, महिलाओं के आरक्षण पर दी फिर से प्रतिबद्धता

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'नारी शक्ति' के लिए पीएम मोदी का नया पत्र, महिलाओं के आरक्षण पर दी फिर से प्रतिबद्धता

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को संबोधित कर एक पत्र में विधायी निकायों में आरक्षण के मुद्दे पर समर्थन जताया। उन्होंने नारी शक्ति को आश्वासन दिया कि सरकार इस महत्वपूर्ण कदम को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य बातें

पीएम मोदी का पत्र महिलाओं के आरक्षण पर है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है।
महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है।
सरकार महिलाओं को विधायिका में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिलाएं अपने सांसदों को पत्र लिखकर समर्थन कर सकती हैं।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने विधायी निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए मिल रहे समर्थन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस पत्र के माध्यम से 'नारी शक्ति' को आश्वासन दिया कि दशकों से लंबित इस महत्वपूर्ण कदम को लागू करने में सरकार की पूरी प्रतिबद्धता है।

प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि अप्रैल का यह महीना ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह बीआर अंबेडकर की जयंती का अवसर है। उन्होंने बाबा साहेब बीआर अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए बताया कि उनका संविधान निर्माण में दिया गया योगदान आज भी देश को मार्गदर्शन कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि आज की भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और यह हमारे समय की सबसे सुखद छवियों में से एक है। उन्होंने स्टार्टअप्स, विज्ञान, शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। विशेषकर खेल क्षेत्र में छोटे-छोटे शहरों से निकलकर भारतीय महिलाएं नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर कई स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं और यह दिखा रहे हैं कि सामूहिक प्रयास से बड़ा परिवर्तन संभव है। प्रधानमंत्री ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कई वर्षों पहले सरदार पटेल ने अहमदाबाद म्युनिसिपैलिटी में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने की पहल की थी। आजादी के बाद भारत ने पुरुषों और महिलाओं को समान मतदान का अधिकार दिया, जबकि कई देशों को इसके लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कई दशकों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इस संदर्भ में महिलाओं को विधायी संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व देना अब समय की आवश्यकता बन गई है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा और तब तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएं नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रियता से शामिल होंगी, तो देश की प्रगति अधिक तेज होगी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी सोच के तहत 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लाया गया है, जो महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संसद में इस संवैधानिक संशोधन को जल्द ही पारित किया जाएगा।

पत्र में प्रधानमंत्री ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने-अपने सांसदों को पत्र लिखकर इस विधेयक का समर्थन करने के लिए प्रेरित करें। यह कदम आने वाली कई पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करेगा। साथ ही उन्होंने सभी महिलाओं को आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने महिलाओं के आरक्षण पर क्या कहा?
पीएम मोदी ने पत्र में कहा कि सरकार महिलाओं के विधायी आरक्षण को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
यह अधिनियम महिलाओं को विधायी निकायों में आरक्षण सुनिश्चित करता है।
महिलाओं की भागीदारी किस प्रकार बढ़ रही है?
महिलाएं स्टार्टअप्स, खेल, शिक्षा आदि क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।
सरकार ने महिलाओं के लिए क्या प्रयास किए हैं?
सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं।
क्या महिलाएं पत्र लिखकर इस विधेयक का समर्थन कर सकती हैं?
हां, पीएम मोदी ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने सांसदों को पत्र लिखकर इस विधेयक का समर्थन करें।
राष्ट्र प्रेस
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