वित्त मंत्री ने पीएम मुद्रा योजना से छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने की बात की
सारांश
Key Takeaways
- पीएम मुद्रा योजना छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाती है।
- बिना गारंटी लोन प्रदान किया जाता है।
- महिलाओं को प्राप्त लोन का प्रतिशत 68%25 है।
- तरुण प्लस कैटेगरी में 20 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध है।
- एनपीए स्तर अन्य श्रेणियों की तुलना में कम है।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) देश के छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के अंतर्गत बिना किसी गारंटी के लोन प्रदान किया जाता है, जिससे लाखों लोग अपने व्यापारिक विचारों को सहजता से प्रारंभ कर पा रहे हैं।
राज्यसभा में योजना के प्रभाव से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत तीन श्रेणियों में लोन दिए जाते हैं - शिशु (50,000 रुपये तक), किशोर (50,001 से 5 लाख रुपये तक) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपये तक)। ये तीनों श्रेणियां विभिन्न स्तर के व्यापार के लिए हैं, जिससे छोटे और सूक्ष्म व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलता है।
31 मार्च 2025 तक के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, शिशु श्रेणी में 12.4 प्रतिशत, किशोर में 9.4 प्रतिशत और तरुण में 7.92 प्रतिशत लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में दर्ज किए गए हैं। बैंकों द्वारा इन लोन की वसूली के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि योजना को लम्बे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।
वित्त मंत्री ने तरुण प्लस श्रेणी के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना विशेष रूप से उन उद्यमियों के लिए है जिन्होंने पहले के तरुण लोन को समय पर चुकता किया है और अब अपने व्यापार को और विस्तार देना चाहते हैं।
यह नई श्रेणी केंद्रीय बजट 2024-25 के बाद शुरू की गई थी और अक्टूबर 2024 से लागू हुई है। इस पर उन्होंने कहा कि चूंकि यह योजना अभी नवजात है, इसलिए इसके सही प्रभाव को देखने के लिए थोड़ा समय देना आवश्यक है।
2015 में आरंभ हुई पीएम मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक 52 करोड़ से अधिक लोन प्रदान किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त लोन भी स्वीकृत किए गए हैं।
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ महिला उद्यमियों को मिला है, क्योंकि कुल लोन में से लगभग 68 प्रतिशत लोन महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।
सरकार छोटे व्यापारियों को सुगमता से लोन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि आत्मनिर्भर भारत और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके।
वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वित्तीय क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हो रही है। आँकड़ों के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र का कुल एनपीए मार्च 2025 तक लगभग 3.6 प्रतिशत रहा, जो मुद्रा योजना के आँकड़ों से कम है।