क्या टीएमसी पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव नहीं चाहती? प्रतुल शाह देव का आरोप
सारांश
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नई दिल्ली, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव कराने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
प्रतुल शाह देव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि संविधान ने चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया है कि वह हर चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए। इस दिशा में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मिले अनुभव कड़े रहे हैं। इसलिए इस बार यह आवश्यक है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कोई भी अप्रिय स्थिति न बने। ज्ञानेश कुमार के इस बयान का हम स्वागत करते हैं।
प्रतुल शाह देव ने टीएमसी पर हमला करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका कार्यभार ज्ञानेश कुमार के पास है। जब वे पश्चिम बंगाल जाकर विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से कराने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हैं, तो इसमें गलत क्या है? इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमें सभी लोगों को इसका स्वागत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि टीएमसी के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। मैं तो यही कहूंगा कि ये लोग टीएमसी के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि गुंडे हैं, और इन्हें भारतीय राजनीति में किसी भी कीमत पर स्थान नहीं मिलना चाहिए।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि यह स्पष्ट होता है कि टीएमसी नहीं चाहती कि प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव हों। इसके चलते टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार को काले झंडे दिखाए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले राष्ट्रपति का भी अपमान किया था और अब इन लोगों ने संवैधानिक संस्थाओं को तहस नहस कर दिया है।
भाजपा प्रवक्ता ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश में किसी भी कीमत पर भगवा झंडा नहीं फहराया जा सकता।
उन्होंने स्टालिन के बयान को उनके अहंकार का परिणाम बताया और कहा कि दिनकर की कविता का जिक्र करते हुए जब नाश मनुष्य पर छाता है, तो पहले विवेक मर जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार स्टालिन का सत्ता से बाहर जाना निश्चित है। स्टालिन के शासन में प्रदेश में भ्रष्टाचार का आलम है। इन लोगों को जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद जनता ने इन्हें फिर से मौका दिया है, जबकि वहां पर सत्ता रिपीट नहीं होती है। लेकिन दुख की बात है कि एमके स्टालिन ने फिर से जनता को धोखा दिया है। इस बार उनका जाना तय है।