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मकोका फरार आरोपी सचिन घायवल राजस्थान के सीकर से गिरफ्तार, 9 महीने बाद पुणे क्राइम ब्रांच को सफलता

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मकोका फरार आरोपी सचिन घायवल राजस्थान के सीकर से गिरफ्तार, 9 महीने बाद पुणे क्राइम ब्रांच को सफलता

सारांश

नौ महीने की फरारी के बाद पुणे क्राइम ब्रांच ने मकोका आरोपी सचिन घायवल को राजस्थान के सीकर से दबोचा। तकनीकी खुफिया जानकारी और राजस्थान पुलिस के सहयोग से सफल हुए इस अंतर-राज्यीय अभियान में मोबाइल फोन, एटीएम व डेबिट कार्ड बरामद हुए।

मुख्य बातें

पुणे क्राइम ब्रांच ने 5 जून 2026 को मकोका आरोपी सचिन घायवल को राजस्थान के सीकर जिले से गिरफ्तार किया।
आरोपी पिछले नौ महीनों से फरार था और घायवल गैंग का सदस्य बताया जाता है।
गिरफ्तारी तकनीकी खुफिया जानकारी और राजस्थान पुलिस के सहयोग से संभव हुई।
आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड बरामद; कोई हथियार नहीं मिला।
जांच एजेंसियाँ बरामद उपकरणों की जांच कर गिरोह के नेटवर्क का पता लगा रही हैं।

पुणे क्राइम ब्रांच ने 5 जून 2026 को महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत वांछित फरार आरोपी सचिन घायवल को राजस्थान के सीकर जिले से गिरफ्तार किया। आरोपी पिछले नौ महीनों से कानून की गिरफ्त से बाहर था और पुलिस उसे लगातार तलाश रही थी। तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए सुनियोजित अभियान में राजस्थान पुलिस के सहयोग से यह गिरफ्तारी संभव हो सकी।

कैसे हुई गिरफ्तारी

क्राइम डीसीपी गौहर हसन ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी स्रोतों से सूचना मिली कि घायवल गैंग का सदस्य सचिन घायवल सीकर जिले में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम तत्काल राजस्थान रवाना की गई। स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर आरोपी को दबोच लिया गया।

डीसीपी हसन ने बताया कि उन्होंने स्वयं सीकर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से संपर्क किया था, जिन्होंने पूरे अभियान में सक्रिय सहयोग दिया। यह अंतर-राज्यीय समन्वय इस गिरफ्तारी की सफलता की कुंजी रही।

बरामदगी और जांच

गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास कोई हथियार नहीं मिला। हालांकि, तलाशी के दौरान उसके कब्जे से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड बरामद किए गए। जांच एजेंसियाँ इन बरामद वस्तुओं की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फरारी के दौरान आरोपी किन गतिविधियों में संलिप्त था और उसके संपर्क में कौन-कौन से लोग थे।

आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सचिन घायवल पर मकोका सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह संगठित अपराध गिरोह से जुड़ा बताया जाता है और लंबे समय से कानून से बचता आ रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब पुणे पुलिस संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई कर रही है।

आगे क्या होगा

जांच एजेंसियाँ अब आरोपी से गहन पूछताछ कर उसके गिरोह के नेटवर्क, सहयोगियों और फरारी के दौरान की गतिविधियों की पूरी तस्वीर उजागर करने में जुटी हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कार्डों की फोरेंसिक जांच से नए सुराग मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मकोका जैसे कड़े कानून के बावजूद आरोपी नौ महीने तक फरार कैसे रहा। बरामद मोबाइल फोन और बैंक कार्ड संकेत देते हैं कि वह फरारी के दौरान भी सक्रिय था — यह जांच का केंद्रबिंदु होना चाहिए। पुणे में संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाइयाँ बढ़ी हैं, पर गिरफ्तारी से बड़ी चुनौती है गिरोह की जड़ें उखाड़ना, जो केवल पूछताछ और नेटवर्क-मैपिंग से ही संभव है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन घायवल कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
सचिन घायवल घायवल गैंग का सदस्य है, जिस पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पिछले नौ महीनों से फरार था और पुणे क्राइम ब्रांच उसे लगातार तलाश रही थी।
पुणे क्राइम ब्रांच ने आरोपी को कैसे ट्रैक किया?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी खुफिया जानकारी (टेक्निकल इंटेलिजेंस) के ज़रिए पता चला कि आरोपी राजस्थान के सीकर जिले में छिपा है। इसके बाद क्राइम ब्रांच की विशेष टीम और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे दबोचा।
गिरफ्तारी के दौरान क्या बरामद हुआ?
आरोपी के पास कोई हथियार नहीं मिला। तलाशी में कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड बरामद हुए, जिनकी जांच जारी है।
मकोका (MCOCA) क्या है?
महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) महाराष्ट्र का एक कड़ा कानून है जो संगठित अपराध गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है। इसके तहत आरोपी पर जमानत मिलना बेहद कठिन होता है और सज़ा भी कड़ी होती है।
राष्ट्र प्रेस
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