पंजाब विधानसभा ने पेपर लीक के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया, भगवंत मान ने केंद्र को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा ने सोमवार, 3 अगस्त को देश भर में बार-बार हो रहे पेपर लीक की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया। चंडीगढ़ में आयोजित सदन की इस बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
प्रस्ताव में क्या है
पारित निंदा प्रस्ताव को पंजाब सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। इसमें केंद्र से पेपर लीक रोकने और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
मुख्यमंत्री मान के प्रमुख आरोप
सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद से देश में 93 बार पेपर लीक हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2019 और 2024 के बीच इनकी संख्या 65 रही, और अधिकांश मामले राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा मध्य प्रदेश में भाजपा शासन के दौरान सामने आए।
मान ने यह भी कहा कि नीट परीक्षा विवाद के बाद 22 उम्मीदवारों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली — जो इस संकट की मानवीय कीमत को रेखांकित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय माँगने वाले छात्रों पर आंसू गैस, पैलेट गन और पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया, जबकि दुनिया भर में पैलेट गन पर रोक है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन से वॉकआउट किया। कांग्रेस ने इस कदम पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया, लेकिन उसके वॉकआउट को सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीतिक रणनीति पर असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
सीबीआई जाँच और जवाबदेही पर सवाल
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि हर बार केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जाँच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जाता। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षाएँ सुचारू रूप से कराने के लिए रक्षा सेवाओं की मदद लेना शिक्षा व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
पंजाब सरकार यह प्रस्ताव केंद्र को भेजने के बाद उसके जवाब की प्रतीक्षा करेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्र आंदोलन जारी है और केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।