पंजाब में कक्षा 1 से 12 तक एआई अनिवार्य विषय, 'सरबत.एआई' परियोजना से भारत का पहला राज्य बना
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार ने 22 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कक्षा 1 से 12 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अनिवार्य मुख्य विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया। इस कदम के साथ पंजाब, भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक एआई को पाठ्यक्रम में स्थान दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) के तत्वावधान में 'सरबत.एआई' परियोजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षा विशेषज्ञ, तकनीकी भागीदार और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया भी इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
बैंस ने कहा, “हम हरित क्रांति का नेतृत्व करने से आगे बढ़कर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति का नेतृत्व करने की ओर बढ़ रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार चाहती है कि पंजाब का हर बच्चा न केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो, बल्कि तकनीक आधारित दुनिया में नवाचार करने वाला और नए विचारों का सृजन करने वाला भी बने।
पाठ्यक्रम की रूपरेखा और चरणबद्ध क्रियान्वयन
यह पाठ्यक्रम सिंगापुर, फिनलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका की सर्वोत्तम शैक्षणिक प्रणालियों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसे यूनेस्को के एथिकल एआई फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाया गया है, ताकि छात्र एआई का सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सीख सकें।
पहले चरण में कक्षा 8 से 12 तक के सरकारी और संबद्ध निजी स्कूलों के कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम में एआई को शामिल किया जाएगा। छात्र लाइव ऑनलाइन कक्षाओं, रिकॉर्डेड व्याख्यानों, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, निरंतर मूल्यांकन और विशेष लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से पढ़ाई करेंगे।
दूसरे चरण में एआई शिक्षा को कक्षा 1 से 7 तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे प्रारंभिक स्तर से ही बच्चों को आयु के अनुरूप एआई शिक्षा मिल सके। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी डिजिटल कौशल और कोडिंग पर ज़ोर दे रही है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पूर्व दिल्ली शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह पहल इस बात को दर्शाती है कि राज्य केवल छात्रों को एआई का उपयोग करना ही नहीं सिखाना चाहता, बल्कि उन्हें इसके माध्यम से नवाचार करने, नई चीजें बनाने और तकनीक आधारित भविष्य का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार कर रहा है।
शिक्षा मंत्री बैंस के अनुसार यह पहल छात्रों में नवाचार, नैतिक एआई, उद्यमिता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता की भावना विकसित करेगी — जो वैश्विक श्रम बाजार की बदलती माँगों के अनुरूप है।
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह योजना पंजाब के लाखों सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों को प्रभावित करेगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में तकनीकी क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की माँग तेजी से बढ़ रही है। आलोचकों का कहना है कि क्रियान्वयन की सफलता शिक्षकों के प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
क्या होगा आगे
पीएसईबी पहले चरण को प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगा। दूसरे चरण की समयसीमा और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तृत ब्यौरा आने वाले हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।