पंजाब में 30 साल बाद भूजल स्तर ऊपर आया, भाखड़ा बांध पूरी तरह सुरक्षित: मंत्री बरिंदर गोयल
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने 31 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में घोषणा की कि राज्य में करीब 30 वर्षों में पहली बार भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा नहर व्यवस्था और जल प्रबंधन में किए गए प्रयासों का यह सीधा परिणाम है।
भूजल स्तर में सुधार के आंकड़े
गोयल के अनुसार, 2022 में पंजाब के 117 ब्लॉक ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में थे, जो अब घटकर 110 रह गए हैं। वहीं, सुरक्षित श्रेणी के ब्लॉकों की संख्या 17 से बढ़कर 20 हो गई है। क्रिटिकल श्रेणी में यह संख्या 15 से बढ़कर 17 हुई है। उन्होंने बताया कि 2021-22 में भूजल दोहन 164 प्रतिशत तक पहुँच गया था, जो अब घटकर करीब 152 प्रतिशत रह गया है — यानी लगभग 14 प्रतिशत की कमी। इस सुधार का उल्लेख केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में भी किया गया है।
भाखड़ा बांध की सुरक्षा पर स्पष्टीकरण
भाखड़ा बांध में कथित झुकाव को लेकर उठे विवाद पर मंत्री गोयल ने कहा कि यह झुकाव बांध की मूल डिज़ाइन का हिस्सा है और इसे खतरे के रूप में पेश करना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने बताया कि 1995 से 2025 के बीच बांध में करीब 15 बार ऐसा डिफ्लेक्शन दर्ज किया गया है। डिज़ाइन के अनुसार बांध में अधिकतम 1.03 इंच तक डिफ्लेक्शन हो सकती है और जल दबाव कम होने पर यह स्वतः अपनी पूर्व स्थिति में लौट आता है। गोयल ने यह भी बताया कि विदेशी विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बांध की संरचनात्मक मजबूती की सराहना की थी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि बांध से जुड़ी कोई भी जानकारी केवल अधिकारियों और विशेषज्ञों की पुष्टि के बाद ही साझा करें।
नशे के खिलाफ कार्रवाई
नशे के मुद्दे पर मंत्री ने स्वीकार किया कि सरकार यह दावा नहीं करती कि पंजाब से नशा 100 प्रतिशत समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने कहा कि अब तस्करों के लिए खुलेआम काम करना पहले जितना आसान नहीं रहा। उनके अनुसार, कई तस्कर जेल में हैं, कुछ जमानत के प्रयास में हैं और कई फरार हैं। नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए सरकार कुछ मकानों को गिरा रही है।
आगे की राह
गोयल ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखेगी और राज्य को इस समस्या से बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता है। जल प्रबंधन के मोर्चे पर भी नहर व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के प्रयास जारी रहेंगे, ताकि भूजल स्तर में सुधार की यह प्रवृत्ति बनी रहे।