राबड़ी-नीतीश आवास विवाद: शिवसेना (यूबीटी) बोली — दोनों नेताओं को नियमानुसार बंगला खाली करना चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 1 जून 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि बिहार में सरकारी आवास विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार — दोनों को ही अपनी वर्तमान पात्रता के अनुरूप सरकारी बंगला खाली करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी आवासों का रखरखाव जनता के करों से होता है, इसलिए पद छोड़ने के बाद किसी भी व्यक्ति को नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद जेडीजे के संस्थापक तेज प्रताप यादव के उस बयान के बाद उभरा, जिसमें उन्होंने पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर नीतीश कुमार पर सवाल उठाए। आनंद दुबे ने इस पर कहा कि यह कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए कि पहले कौन बंगला खाली करे — चूँकि न नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री हैं और न राबड़ी देवी, इसलिए दोनों को अपने पद और पात्रता के अनुसार आवास लेना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बेटे का अपनी माँ के समर्थन में आना स्वाभाविक है, लेकिन लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था के हित में दोनों नेताओं को नियमों का पालन करना चाहिए।
पश्चिम बंगाल हिंसा पर भाजपा को घेरा
आनंद दुबे ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर कथित हमलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बार-बार चुने गए सांसदों पर हमला केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धरना, भूख हड़ताल या मार्च जैसे लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है।
दुबे ने कहा कि BJP को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है — वह सत्ता में बदलाव का वादा लेकर आई थी, लेकिन यदि राजनीतिक हिंसा जारी रही तो जनता सवाल उठाएगी। उन्होंने कहा कि जो लोग TMC के 15 वर्षों के शासन की घटनाएँ याद रखते हैं, वे BJP शासन में हुई हालिया हिंसा को भी याद रखेंगे।
महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव: महायुति पर निशाना
महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनावों पर बोलते हुए आनंद दुबे ने दावा किया कि महायुति गठबंधन के भीतर गंभीर अंतर्विरोध और आपसी संघर्ष चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना एक-दूसरे को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं और उनके बीच केवल दिखावटी एकता है। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) ने डॉक्टरों और इंजीनियरों जैसे शिक्षित उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
दुबे ने यह भी स्पष्ट किया कि MLC चुनाव सीधे जनता नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि तय करते हैं। उनके अनुसार, कागजों पर महायुति के आँकड़े भले ही अधिक दिखें, लेकिन जनसमर्थन के लिहाज से महा विकास अघाड़ी (MVA) अधिक मजबूत स्थिति में है।
सीट बंटवारे पर स्थिति
सीट बंटवारे पर आनंद दुबे ने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) फिलहाल पाँच या छह सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और जल्द अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि MVA के भीतर कांग्रेस ने राज्यसभा और MLC सीटों में अधिक हिस्सेदारी की माँग की थी, जिस पर सहयोगी दलों ने सहमति जताई है। गठबंधन के भीतर बातचीत जारी है और जल्द ही सभी सीटों पर सहमति बन जाएगी।