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राहुल गांधी का देहरादून में बड़ा आरोप: 10 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य दांव पर

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राहुल गांधी का देहरादून में बड़ा आरोप: 10 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य दांव पर

सारांश

देहरादून में छात्रों से मुखातिब राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर सबसे तीखा हमला बोला — 10 साल में 152 पेपर लीक, 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद, और दोष सिद्धि दर शून्य। उनका सवाल सीधा है: जब अपराध साबित होता है तो सज़ा क्यों नहीं?

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 17 जुलाई को देहरादून में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए — यानी औसतन हर महीने एक लीक ।
इन लीक से 7.5 करोड़ से अधिक युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ; एक छात्र के परिवार का औसत खर्च ₹9 लाख बताया।
गांधी के अनुसार पेपर लीक मामलों में दोष सिद्धि दर शून्य है — आज तक कोई जेल नहीं गया।
उन्होंने छात्र-केंद्रित , स्वतंत्र और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली की माँग की।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 17 जुलाई को देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि भारत में पेपर लीक अब एक सामान्य घटना बन चुकी है और इसमें पूरी शिक्षा व्यवस्था की संलिप्तता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, जिससे 7.5 करोड़ से अधिक युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ, फिर भी आज तक एक भी दोषी को सज़ा नहीं मिली।

मुख्य आरोप और आँकड़े

राहुल गांधी ने कहा कि एक औसत छात्र परीक्षा की तैयारी में पाँच साल तक रोज़ाना 10 घंटे मेहनत करता है और इस दौरान उसके परिवार का औसतन ₹9 लाख खर्च होता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में हुए 152 पेपर लीक का अर्थ है कि औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि सरकारी सीट और नौकरी का 'रेट कार्ड' तैयार हो चुका है, लेकिन दोष सिद्धि की दर शून्य बनी हुई है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली सरकार-केंद्रित है, जबकि देश को अब छात्र-केंद्रित व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो स्वतंत्र, जवाबदेह और छात्रों को पूर्ण सुरक्षा देने वाली हो। उनके अनुसार इस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को जड़ से बदलने की ज़रूरत है।

दो रास्तों का ज़िक्र

राहुल गांधी ने छात्रों के सामने दो रास्तों की बात कही। पहला — ईमानदारी और मेहनत का रास्ता, जिसमें पाँच साल तक रोज़ाना आठ घंटे की मेहनत, आर्थिक बोझ, पारिवारिक दबाव और उम्र सीमा की चुनौतियाँ शामिल हैं। दूसरा — पेपर लीक का छिपा हुआ रास्ता, जो उनके अनुसार केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बनने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि 99.9 प्रतिशत छात्र ईमानदारी का रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवस्था का दुरुपयोग कर बाकी सभी को नुकसान पहुँचाते हैं।

जवाबदेही पर सवाल

गांधी ने ज़ोर देकर कहा कि पेपर लीक के मामले में दोष सिद्धि की दर पूरी तरह शून्य है — आज तक इस अपराध के लिए एक भी व्यक्ति जेल नहीं गया और न ही किसी को कोई सज़ा मिली है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और छात्र संगठन सुधार की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरता रहा है।

आगे की राह

राहुल गांधी ने छात्रों से आह्वान किया कि वे इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाएँ। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस एक स्वतंत्र और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो छात्रों के हितों की रक्षा करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

7.5 करोड़ प्रभावित छात्र — राजनीतिक हथियार के रूप में प्रभावशाली हैं, लेकिन इनके स्रोत और सत्यापन की माँग भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी सरकार से जवाबदेही। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष केवल सुर्खियाँ बटोर रहा है या एक ठोस वैकल्पिक परीक्षा सुधार का खाका भी पेश करेगा। शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मुद्दा वास्तविक और गंभीर है, लेकिन इसका समाधान भाषणों से नहीं, बल्कि संसद में विधायी दबाव और राज्य सरकारों की जवाबदेही से आएगा — जिनमें कुछ कांग्रेस-शासित भी हैं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या है और यह कहाँ हुआ?
'छात्रों की गूंज' एक संवाद कार्यक्रम है जिसमें राहुल गांधी ने 17 जुलाई को देहरादून, उत्तराखंड में छात्रों से सीधे बातचीत की। इस आयोजन में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर क्या दावे किए?
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए — औसतन हर महीने एक — और इससे 7.5 करोड़ से अधिक युवा प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इन मामलों में दोष सिद्धि दर शून्य है और आज तक एक भी व्यक्ति को सज़ा नहीं मिली।
राहुल गांधी के अनुसार पेपर लीक से छात्रों को कितना नुकसान होता है?
उनके अनुसार एक छात्र पाँच साल तक रोज़ाना 10 घंटे तैयारी करता है और उसके परिवार का औसतन ₹9 लाख खर्च होता है। इसके बावजूद पेपर लीक के कारण उसकी मेहनत बेकार हो जाती है, जबकि दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
राहुल गांधी ने शिक्षा सुधार के लिए क्या सुझाव दिए?
उन्होंने सरकार-केंद्रित व्यवस्था की जगह छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली लाने की माँग की। साथ ही कहा कि 21वीं सदी की परीक्षा प्रणाली स्वतंत्र, जवाबदेह और छात्रों को पूर्ण सुरक्षा देने वाली होनी चाहिए।
पेपर लीक मामले में सज़ा क्यों नहीं होती?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक में पूरी शिक्षा व्यवस्था की संलिप्तता है, इसीलिए दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उनके अनुसार दोष सिद्धि की दर शून्य है, जो इस भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने का संकेत देती है।
राष्ट्र प्रेस
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