पेपर लीक से 12 साल में 10 करोड़ छात्र प्रभावित: CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने 19 जून 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली गहरे संकट में है और पिछले 12 वर्षों में लगभग 10 करोड़ छात्र पेपर लीक तथा परीक्षा अनियमितताओं से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं। यह बयान ऐसे समय आया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी, जो परीक्षा से संबंधित सामग्री लीक मामलों में अदालती कार्यवाही से जुड़ी थी।
परीक्षा प्रणाली की बिगड़ती स्थिति
मोल्लाह ने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह से धाँधली हो रही है, वह अत्यंत चिंताजनक है। उनके अनुसार, बार-बार परीक्षाएँ रद्द होने से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है और युवा वर्ग में गहरी निराशा पैदा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली के पीछे की साजिश अब उजागर हो चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा रद्द होने या परिणामों में अनावश्यक देरी के कारण गंभीर मानसिक तनाव झेल रहे हैं। मोल्लाह ने आरोप लगाया कि इस अव्यवस्था के चलते कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसा दुखद कदम भी उठाया है — हालाँकि उन्होंने इस दावे के लिए कोई आधिकारिक आँकड़ा प्रस्तुत नहीं किया।
सरकार पर जवाबदेही का सवाल
पूर्व सांसद ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी प्रशासनिक विफलता के बावजूद जिम्मेदार मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं। उनके अनुसार, सरकार इस संकट के समाधान के लिए पर्याप्त और ठोस कदम नहीं उठा रही है। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा सुधार की माँग वर्षों से उठती रही है, लेकिन नीतिगत स्तर पर सार्थक बदलाव नहीं आया।
किसान और भूमि अधिकार आंदोलन
मोल्लाह ने इसी बातचीत में किसानों और भूमि अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलन पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी गाँवों में रहती है और रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर झुग्गी-बस्तियों में जीवन बिताने को मजबूर है। उनके अनुसार, किसान केवल अपने परिवार का पेट नहीं भरते बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार किसान-विरोधी नीतियों पर काम कर रही है — किसान मेहनत से फसल उगाते हैं, लेकिन उन्हें उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान आत्महत्या की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार इस समस्या के प्रति संवेदनशील नहीं दिखती।
वादाखिलाफी और संघर्ष का संकल्प
केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मोल्लाह ने कहा कि किसानों और आम जनता से किए गए कई वादे पिछले 10 वर्षों में पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य लोगों को संगठित कर उनकी आवाज को मजबूत करना है।
उन्होंने सरकार से माँग की कि वह किसानों, मजदूरों और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से ले।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा सुधार और कृषि नीति को लेकर विपक्षी दलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इन दोनों मोर्चों पर क्या ठोस नीतिगत प्रतिक्रिया देती है।