पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही शून्य, नए कानून का शोर महज धोखा: जगत सिंह नेगी
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने 24 जुलाई को शिमला में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला — उनका आरोप है कि सरकार पेपर लीक जैसे गंभीर संकट में जवाबदेही से बचने के लिए नए कानून बनाने का भ्रामक वादा कर रही है, जबकि मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में उठे आंदोलन ने देशभर के युवाओं में नई चेतना जगाई है।
12 वर्षों में 152 बार पेपर लीक, लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर
नेगी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में 152 बार पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं, जिससे लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं की पीड़ा इतनी गहरी रही कि कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या तक का कदम उठाया — फिर भी केंद्र सरकार ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जैसी शक्तिशाली एजेंसियाँ केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में हैं, तो पेपर लीक के आरोपियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नीट पेपर लीक: 90 दिन में चार्जशीट नहीं, आरोपी जमानत पर बाहर
नेगी ने विशेष रूप से नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण आरोपियों को जमानत मिल गई, जो जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जाँच होनी चाहिए।
नेगी ने तर्क दिया कि यदि आर्थिक अपराधों में ED सक्रिय हो सकती है, तो पेपर लीक मामलों में भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अन्य मामलों में पर्याप्त साक्ष्य के बिना लोगों को लंबे समय तक जेल में रखती है, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों को समय पर चार्जशीट न होने से राहत मिल जाती है।
सरकार की प्रतिक्रिया और नैतिक जिम्मेदारी का सवाल
राजस्व मंत्री ने केंद्र सरकार से सीधे पूछा कि यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की वास्तविक मंशा है, तो उपलब्ध कानूनों के तहत तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है — शिक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी विफलता के बाद संबंधित मंत्रालय के मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार नैतिक जवाबदेही से लगातार बचती रही है, जिससे आम जनता का विश्वास कमज़ोर हो रहा है।
सोनम वांगचुक का आंदोलन और युवाओं की जागृति
नेगी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक अनशन किया और देश के युवाओं को एक मज़बूत दिशा दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरुआत में इसे सीमित प्रदर्शन समझने की भूल की, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है।
गौरतलब है कि विदेश में रहने वाले भारतीय छात्र और प्रवासी भारतीय भी परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर अपनी चिंता खुलकर व्यक्त कर रहे हैं।
आगे की राह: राजनीतिक इच्छाशक्ति ही एकमात्र समाधान
नेगी का स्पष्ट मत है कि केवल नए कानून बनाने की घोषणाएँ समस्या का समाधान नहीं करतीं — राजनीतिक इच्छाशक्ति और मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन ही पेपर लीक पर वास्तविक रोक लगा सकता है। देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए सरकार को राजनीतिक बयानबाज़ी छोड़कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।