24 जुलाई 2026
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पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही शून्य, नए कानून का शोर महज धोखा: जगत सिंह नेगी

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पेपर लीक पर केंद्र की जवाबदेही शून्य, नए कानून का शोर महज धोखा: जगत सिंह नेगी

सारांश

हिमाचल के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र पर सीधा निशाना साधा — 12 वर्षों में 152 पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्याएँ, और नीट में चार्जशीट न होने से आरोपी जमानत पर। उनका सवाल: नए कानून का शोर क्यों, जब मौजूदा कानून लागू ही नहीं होते?

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने 24 जुलाई को शिमला में केंद्र सरकार पर पेपर लीक में जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
पिछले 12 वर्षों में देश में 152 बार पेपर लीक हुए, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और कई ने आत्महत्या की।
नीट पेपर लीक में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने से आरोपियों को जमानत मिली — नेगी ने इसे जाँच एजेंसियों की विफलता बताया।
नेगी की माँग — पेपर लीक मामलों में ED और CBI के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की भी जाँच हो।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को नेगी ने युवाओं की जागृति का प्रतीक बताया।
नेगी ने कहा कि संबंधित मंत्रालय के मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने 24 जुलाई को शिमला में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला — उनका आरोप है कि सरकार पेपर लीक जैसे गंभीर संकट में जवाबदेही से बचने के लिए नए कानून बनाने का भ्रामक वादा कर रही है, जबकि मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में उठे आंदोलन ने देशभर के युवाओं में नई चेतना जगाई है।

12 वर्षों में 152 बार पेपर लीक, लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर

नेगी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में 152 बार पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं, जिससे लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं की पीड़ा इतनी गहरी रही कि कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या तक का कदम उठाया — फिर भी केंद्र सरकार ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जैसी शक्तिशाली एजेंसियाँ केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में हैं, तो पेपर लीक के आरोपियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

नीट पेपर लीक: 90 दिन में चार्जशीट नहीं, आरोपी जमानत पर बाहर

नेगी ने विशेष रूप से नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण आरोपियों को जमानत मिल गई, जो जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जाँच होनी चाहिए।

नेगी ने तर्क दिया कि यदि आर्थिक अपराधों में ED सक्रिय हो सकती है, तो पेपर लीक मामलों में भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अन्य मामलों में पर्याप्त साक्ष्य के बिना लोगों को लंबे समय तक जेल में रखती है, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों को समय पर चार्जशीट न होने से राहत मिल जाती है।

सरकार की प्रतिक्रिया और नैतिक जिम्मेदारी का सवाल

राजस्व मंत्री ने केंद्र सरकार से सीधे पूछा कि यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की वास्तविक मंशा है, तो उपलब्ध कानूनों के तहत तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है — शिक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी विफलता के बाद संबंधित मंत्रालय के मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार नैतिक जवाबदेही से लगातार बचती रही है, जिससे आम जनता का विश्वास कमज़ोर हो रहा है।

सोनम वांगचुक का आंदोलन और युवाओं की जागृति

नेगी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक अनशन किया और देश के युवाओं को एक मज़बूत दिशा दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरुआत में इसे सीमित प्रदर्शन समझने की भूल की, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है।

गौरतलब है कि विदेश में रहने वाले भारतीय छात्र और प्रवासी भारतीय भी परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर अपनी चिंता खुलकर व्यक्त कर रहे हैं।

आगे की राह: राजनीतिक इच्छाशक्ति ही एकमात्र समाधान

नेगी का स्पष्ट मत है कि केवल नए कानून बनाने की घोषणाएँ समस्या का समाधान नहीं करतीं — राजनीतिक इच्छाशक्ति और मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन ही पेपर लीक पर वास्तविक रोक लगा सकता है। देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए सरकार को राजनीतिक बयानबाज़ी छोड़कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके द्वारा उठाया गया नीट चार्जशीट वाला बिंदु ठोस और सत्यापन-योग्य है — 90 दिन की समयसीमा भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की स्पष्ट व्यवस्था है, राजनीतिक दावा नहीं। असली प्रश्न यह है कि जब ED मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कागज़ के टुकड़ों को भी साक्ष्य मान लेती है, तो करोड़ों के पेपर लीक नेटवर्क में वह निष्क्रिय क्यों दिखती है। 12 वर्षों में 152 लीक का आँकड़ा यदि सही है, तो यह किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि परीक्षा-तंत्र की संरचनात्मक विफलता है — जिसे नया कानून नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही और डिजिटल सुरक्षा ही ठीक कर सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों में जवाबदेही से बच रही है और नए कानून बनाने की बात कहकर जनता को गुमराह कर रही है। उनके अनुसार, मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त हैं — ज़रूरत उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है।
पिछले 12 वर्षों में कितने पेपर लीक हुए?
नेगी के अनुसार पिछले 12 वर्षों में देश में 152 बार पेपर लीक की घटनाएँ हुईं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के कारण कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या तक की, लेकिन केंद्र सरकार ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।
नीट पेपर लीक में आरोपी जमानत पर कैसे बाहर आए?
नेगी ने बताया कि नीट पेपर लीक मामले में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण आरोपियों को कानूनी प्रावधान के तहत जमानत मिल गई। उन्होंने इसे जाँच एजेंसियों की गंभीर चूक बताया और ED व CBI की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।
सोनम वांगचुक के आंदोलन का पेपर लीक मुद्दे से क्या संबंध है?
नेगी ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने आंदोलन और लंबे अनशन के ज़रिए देशभर के युवाओं में शिक्षा व्यवस्था की खामियों के प्रति जागरूकता पैदा की। यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है और विदेश में रहने वाले भारतीय छात्र भी इससे जुड़ रहे हैं।
नेगी ने पेपर लीक रोकने के लिए क्या सुझाव दिए?
नेगी ने कहा कि पेपर लीक मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की भी जाँच होनी चाहिए और ED को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने माँग की कि राजनीतिक बयानबाज़ी छोड़कर मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए और दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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