25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पेपर लीक पर धनीराम शांडिल का हमला: 'PM संसद में जवाब दें, वीडियो संदेश से नहीं चलेगा काम'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पेपर लीक पर धनीराम शांडिल का हमला: 'PM संसद में जवाब दें, वीडियो संदेश से नहीं चलेगा काम'

सारांश

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने का स्वागत किया, लेकिन साफ कहा — छात्र आंदोलन खत्म नहीं हुआ। लाठीचार्ज की निंदा करते हुए उन्होंने PM मोदी पर निशाना साधा कि वीडियो संदेश नहीं, संसद में जवाब दें।

मुख्य बातें

धनीराम शांडिल ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने को सकारात्मक कदम बताया, लेकिन छात्र आंदोलन को अभी भी जारी बताया।
पेपर लीक मामले में दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई न होना छात्रों की नाराज़गी का मूल कारण बताया।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध और निंदनीय करार दिया।
PM नरेंद्र मोदी पर निशाना — संसद में उपस्थित रहकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें, वीडियो संदेश पर्याप्त नहीं।
माँग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कठोर कानून बनाया जाए।
छात्रों की आलोचना की प्रतिध्वनि अमेरिका सहित विदेशों में भी सुनाई दी।

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने 24 जुलाई को शिमला में कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन पेपर लीक मामले में दोषियों पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण छात्र आंदोलन अभी थमा नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए इसकी कड़ी भर्त्सना की।

वांगचुक का अनशन और छात्र आंदोलन की स्थिति

शांडिल ने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन एक उचित उद्देश्य के लिए था और उसका समाप्त होना स्वागतयोग्य है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की सक्रिय भागीदारी एक अच्छा संकेत है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की मुख्य माँग — पेपर लीक के दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई — अभी तक पूरी नहीं हुई है, इसलिए आंदोलन जारी है।

लाठीचार्ज की निंदा और छात्रों के अधिकार

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि पेपर लीक के दोषियों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई की गई होती, तो हालात इस स्तर तक नहीं बिगड़ते। उनके अनुसार, छात्रों के साथ बल प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। शांडिल ने कहा, 'छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत व विश्वास से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं।' उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।

पेपर लीक और बेरोज़गारी की दोहरी मार

शांडिल ने कहा कि देश में पहले से ही बेरोज़गारी एक गंभीर चुनौती है। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने से मेहनती और योग्य छात्र पीछे रह जाते हैं। इसी चिंता के चलते छात्रों ने शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि इस घटना की आलोचना केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका सहित विदेशों में भी हुई।

PM मोदी पर निशाना: संसद में दें जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए शांडिल ने कहा कि जब देश में इतनी गंभीर घटनाएँ हो रही हों और संसद में इस पर चर्चा चल रही हो, तब प्रधानमंत्री का सदन में उपस्थित रहकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना ज़रूरी है। दो बार सांसद रह चुके शांडिल ने कहा, 'संसद के बजाय वीडियो संदेशों के ज़रिए जवाब देना उचित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद के माध्यम से ही विवादों का समाधान निकाला जाना चाहिए।'

परीक्षा सुधार और आगे की राह

शांडिल ने माँग की कि भविष्य में ऐसा कठोर कानून बनाया जाए जिससे परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो तथा पेपर लीक की संभावना पूरी तरह समाप्त हो। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार केंद्र सरकार और सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस पूरे प्रकरण से सबक लेते हुए छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी माँग में दम है — जब संसद का सत्र चल रहा हो और पेपर लीक जैसा राष्ट्रीय संकट सदन में ज़ेरे-बहस हो, तब प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति और वीडियो संदेश से काम चलाना संसदीय परंपराओं पर सवाल खड़ा करता है। लाठीचार्ज की अंतरराष्ट्रीय आलोचना यह दर्शाती है कि छात्र आंदोलन का दमन कूटनीतिक छवि के लिए भी महँगा पड़ा। असली परीक्षा यह है कि पेपर लीक विरोधी कानून की माँग सिर्फ विपक्षी बयानबाज़ी बनकर रह जाती है या सर्वदलीय दबाव में ठोस विधायी रूप लेती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनीराम शांडिल ने पेपर लीक मामले पर क्या कहा?
शांडिल ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई न होने के कारण छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा। उनके अनुसार, यदि सरकार ने शुरुआत में ही सख्त कदम उठाए होते, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते।
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बाद भी छात्र आंदोलन क्यों जारी है?
शांडिल के अनुसार, छात्रों की मुख्य माँग — पेपर लीक के दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई — अभी तक पूरी नहीं हुई है। वांगचुक का अनशन समाप्त होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन मूल मुद्दा अनसुलझा है।
शांडिल ने PM मोदी की आलोचना क्यों की?
शांडिल ने कहा कि जब संसद में पेपर लीक पर चर्चा चल रही हो, तब प्रधानमंत्री का सदन में मौजूद रहना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि वीडियो संदेशों के ज़रिए जवाब देना लोकतांत्रिक संवाद की भावना के अनुरूप नहीं है।
छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर शांडिल का क्या रुख है?
शांडिल ने लाठीचार्ज को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और विश्वास के ज़रिए होना चाहिए।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए शांडिल ने क्या माँग की?
उन्होंने माँग की कि ऐसा कठोर कानून बनाया जाए जो परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए तथा पेपर लीक की संभावना को समाप्त करे। उन्होंने इसे केंद्र सरकार और सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 11 घंटे पहले
  4. 14 घंटे पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 6 दिन पहले