राजस्थान: डीग में 10 साल के कृष्णा की मौत, उप जिला अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम नहीं था — परिजनों का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के डीग जिले के पुछरी का लौठा क्षेत्र में रविवार रात सांप के काटने से 10 वर्षीय कृष्णा की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि उप जिला चिकित्सालय पुछरी का लौठा में सर्पदंश के उपचार के लिए अनिवार्य एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण बच्चे को समय पर जीवनरक्षक उपचार नहीं मिल सका। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है तथा स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
घटना का विवरण
पुछरी का लौठा निवासी 10 वर्षीय कृष्णा को रविवार रात घर में सांप ने डस लिया। परिजन तत्काल घबराई हालत में बच्चे को उप जिला चिकित्सालय लेकर पहुँचे, उन्हें उम्मीद थी कि समय पर इलाज मिलने से बच्चे की जान बच जाएगी। परंतु परिजनों के अनुसार अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं था।
परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन न मिलने से बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही और अंततः उसकी मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि सर्पदंश जैसी आपातकालीन स्थिति में हर मिनट कीमती होता है। उप जिला चिकित्सालय आसपास के कई गांवों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और ऐसे अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम जैसी आवश्यक जीवनरक्षक दवा का न होना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमज़ोरी को उजागर करता है।
गौरतलब है कि राजस्थान जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के मामले सामान्य हैं, सरकारी अस्पतालों में ASV की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की बुनियादी जिम्मेदारी मानी जाती है।
परिजनों और ग्रामीणों की माँगें
घटना के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है। वे जानना चाहते हैं कि घटना के समय अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध था या नहीं, यदि नहीं था तो आपूर्ति क्यों नहीं की गई, और बच्चे को तत्काल किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की क्या व्यवस्था की गई थी।
ग्रामीणों का यह भी सवाल है कि घटना के समय अस्पताल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे या नहीं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं की कमी और बुनियादी संसाधनों की अनुपलब्धता को लेकर देशभर में चिंताएँ जताई जाती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि उप जिला अस्पताल स्तर पर एंटी-स्नेक वेनम की अनुपलब्धता न केवल लापरवाही है, बल्कि यह उन ग्रामीण परिवारों के साथ अन्याय है जो बड़े शहरों के अस्पतालों तक तत्काल नहीं पहुँच सकते।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जाँच की माँग और जवाबदेही तय होने तक यह मामला डीग और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना रहेगा।