क्या झारखंड के कोडरमा में कफ सिरप पीने से बच्ची की मौत हो गई?

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क्या झारखंड के कोडरमा में कफ सिरप पीने से बच्ची की मौत हो गई?

सारांश

झारखंड के कोडरमा में कफ सिरप के सेवन से एक डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचाया है। क्या यह घटना कफ सिरप की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है? जानें इस गंभीर मामले की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

कफ सिरप की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
बच्ची की उम्र डेढ़ वर्ष थी।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जांच में डायइथाइलीन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पाई गई।

रांची, 21 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के कोडरमा जिले में कफ सिरप के सेवन के बाद डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत की घटना ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। मृत बच्ची की पहचान कोडरमा निवासी रवि भुइयां की पुत्री रागिनी कुमारी के रूप में हुई है।

यह घटना राज्य में कफ सिरप की गुणवत्ता और बच्चों के लिए इसके सुरक्षित उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न उठाती है। परिजनों के अनुसार, रागिनी पिछले दो दिनों से खांसी से पीड़ित थी। घरेलू उपचार के दौरान पास की एक मेडिकल दुकान से कफ सिरप लेकर उसे दिया गया। सिरप का सेवन करते ही बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। वह बेचैन हो गई और उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगी।

परिजन घबराकर बच्ची को रविवार को तुरंत कोडरमा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में शोक का माहौल बन गया। रागिनी की मां का कहना है कि कफ सिरप देने के बाद ही उसकी हालत बिगड़ी और उसकी जान चली गई।

कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग इंस्पेक्टर को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित कफ सिरप की कंपनी, उसकी एक्सपायरी डेट और मेडिकल दुकान की भूमिका की भी जांच की जाएगी। बच्ची की मौत के असली कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

गौरतलब है कि अक्टूबर में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद झारखंड सरकार ने तीन कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगाया था। राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय, नामकुम (रांची) द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि कोल्ड्रेफ, रेपीफ्रेश टीआर, और रिलाइफ सिरप को ‘मानक के विपरीत’ पाया गया है।

जांच रिपोर्ट में इन सिरप में डायइथाइलीन ग्लाइकॉल की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है। निदेशालय ने मेडिकल स्टोर और अस्पतालों में निरीक्षण, सैंपलिंग और नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई के आदेश भी जारी किए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कफ सिरप बच्चों के लिए सुरक्षित है?
कफ सिरप का उपयोग बच्चों के लिए सुरक्षित हो सकता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक है।
बच्ची की मौत का असली कारण क्या था?
बच्ची की मौत का असली कारण जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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