राजस्थान हाईकोर्ट ने तांत्रिक-प्रभावित पुलिस जांच की निंदा की, नागौर चोरी मामले में IO बदलने का आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान हाईकोर्ट ने तांत्रिक-प्रभावित पुलिस जांच की निंदा की, नागौर चोरी मामले में IO बदलने का आदेश

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर की 80 वर्षीय महिला की ज्वेलरी चोरी की जांच में तांत्रिक की राय पर निर्भरता को अस्वीकार्य बताया। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने 15 दिनों में नया जांच अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया — यह फैसला पुलिस जांच में अंधविश्वास की घुसपैठ पर कड़ा संदेश है।

मुख्य बातें

राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर के ज्वेलरी चोरी मामले में तांत्रिक-प्रभावित पुलिस जांच की कड़ी निंदा की।
जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रतिराम पर आरोप — अलवर के तांत्रिक के आधार पर बिना सबूत संदिग्ध तय किए।
राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि जांच अधिकारी स्वयं तांत्रिक के पास गए थे।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने 15 दिनों के भीतर नया IO नियुक्त करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता खेमी देवी (80 वर्ष) ने 8 मार्च को 7 मार्च की रात हुई चोरी की एफआईआर दर्ज कराई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले के एक ज्वेलरी चोरी मामले की पुलिस जांच को लेकर कड़ी फटकार लगाई है, यह पाए जाने के बाद कि जांच अधिकारी ने साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया अपनाने के बजाय अलवर जिले के एक तांत्रिक से राय ली और उसके आधार पर संदिग्ध तय किए। एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने 21 मई को यह आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में आपराधिक जांच तांत्रिक के कहने पर संचालित नहीं हो सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला नागौर के श्री बालाजी थाना क्षेत्र के उतवलिया गांव की 80 वर्षीय याचिकाकर्ता खेमी देवी की याचिका पर आधारित है। खेमी देवी ने 8 मार्च को प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें 7 मार्च की रात उनके घर से सोने-चांदी के गहनों की चोरी का आरोप लगाया गया था।

उनके अधिवक्ता मनोहर सिंह राठौड़ ने अदालत को बताया कि संदिग्धों के नाम पुलिस को दिए जाने के बावजूद जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रतिराम न तो गहने बरामद कर पाए और न ही आरोपियों की पहचान कर सके।

तांत्रिक-प्रभाव का आरोप

याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी ने साक्ष्यों पर ध्यान देने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। आरोप के अनुसार, अलवर जिले के एक तांत्रिक के पास जाकर लड़की के ससुर और कुछ ग्रामीणों से मुलाकात की गई। तांत्रिक ने कथित तौर पर लड़की के ससुर को चोरी में शामिल बताया, जिसके बाद पुलिस ने बिना ठोस सबूत के उन्हें संदिग्ध मानना शुरू कर दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश विक्रम सिंह राजपुरोहित ने स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि जांच अधिकारी ने कई संदिग्धों से पूछताछ की और कई स्थानों का दौरा किया। हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया कि जांच अधिकारी स्वयं अलवर स्थित तांत्रिक के पास गए थे।

अदालत की टिप्पणी

मामले की समीक्षा के बाद अदालत ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि जांच तांत्रिक की राय से प्रभावित हुई हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों की पहचान के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी अदालत ने पुलिस जांच में अंधविश्वास की भूमिका पर चिंता जताई हो। ऐसे मामले न केवल पीड़ितों को न्याय से वंचित करते हैं, बल्कि निर्दोष लोगों को गलत तरीके से संदिग्ध बनाने का जोखिम भी उत्पन्न करते हैं।

अदालत का आदेश

न्यायाधीश जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने निर्देश दिया कि नागौर के एसपी जांच को श्री बालाजी थाने से हटाकर किसी अन्य थाने के एसआई या उससे शीर्ष रैंक के अधिकारी को सौंपें। नए जांच अधिकारी को 15 दिनों के भीतर जांच का कार्यभार संभालने का आदेश दिया गया है।

आगे क्या होगा

अब नागौर एसपी को 15 दिनों के भीतर नया जांच अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया अपनाते हुए मामले की नए सिरे से जांच करेगा। 80 वर्षीय खेमी देवी को उम्मीद है कि नई जांच में उनके गहने बरामद होंगे और असली आरोपियों की पहचान होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित कदम था। अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विभागीय जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी, या केवल IO बदलने से मामला रफा-दफा हो जाएगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर चोरी मामले में क्या आदेश दिया?
अदालत ने नागौर एसपी को निर्देश दिया कि जांच को श्री बालाजी थाने से हटाकर 15 दिनों के भीतर किसी अन्य थाने के एसआई या उससे शीर्ष रैंक के अधिकारी को सौंपा जाए। अदालत ने कहा कि आपराधिक जांच किसी भी स्थिति में तांत्रिक के कहने पर नहीं चल सकती।
तांत्रिक-आधारित जांच का आरोप क्या था?
याचिका के अनुसार, जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रतिराम ने साक्ष्यों पर ध्यान देने के बजाय अलवर जिले के एक तांत्रिक से राय ली और उसके आधार पर लड़की के ससुर को बिना ठोस सबूत के संदिग्ध मान लिया। राज्य सरकार ने अदालत में स्वीकार किया कि जांच अधिकारी स्वयं तांत्रिक के पास गए थे।
याचिकाकर्ता खेमी देवी कौन हैं और उनकी शिकायत क्या थी?
खेमी देवी नागौर जिले के उतवलिया गांव की 80 वर्षीय महिला हैं, जिन्होंने 8 मार्च को एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके घर से 7 मार्च की रात सोने-चांदी के गहने चोरी हुए थे और संदिग्धों के नाम देने के बावजूद पुलिस न गहने बरामद कर सकी और न आरोपियों की पहचान।
इस मामले में अदालत ने क्या टिप्पणी की?
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि जांच तांत्रिक की राय से प्रभावित हुई हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराधियों की पहचान के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
नागौर एसपी को 15 दिनों के भीतर नया जांच अधिकारी नियुक्त करना होगा जो मामले की नए सिरे से साक्ष्य-आधारित जांच करेगा। नए अधिकारी को श्री बालाजी थाने के बाहर से चुना जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले