राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरे राज्यों के निजी वाहनों पर सड़क कर वसूली अवैध
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाई कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को एक अहम फैसले में राजस्थान परिवहन विभाग द्वारा अन्य राज्यों में पंजीकृत निजी कारों और जीपों से सड़क कर वसूलने की कार्रवाई को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी विशिष्ट वैधानिक अधिसूचना के, केवल 30 दिनों से अधिक राज्य में वाहन चलाने के आधार पर कर वसूली का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
मुख्य न्यायिक निर्णय
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि परिवहन विभाग कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत जारी वैध अधिसूचना के अभाव में अन्य राज्यों में पंजीकृत गैर-परिवहन वाहनों पर न तो कर लगा सकता है और न ही वसूल सकता है। हरपी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं का निपटारा करते हुए कोर्ट ने विभाग को 30 दिनों के भीतर वसूला गया कर लौटाने और जब्त वाहनों को तुरंत छोड़ने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं के वाहन हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में पंजीकृत थे। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के समय अपने-अपने राज्यों में आजीवन सड़क कर का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। उनकी मुख्य आपत्ति यह थी कि राजस्थान में 30 दिनों से अधिक वाहन चलाने मात्र से एकमुश्त कर की मांग का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 265 का हवाला देते हुए यह भी तर्क दिया कि कानून के अधिकार के बिना कोई कर न लगाया जा सकता है और न वसूला जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग केवल प्रशासनिक व्याख्याओं के आधार पर, जिनमें ऐसा कर विशेष रूप से अधिकृत न हो, कर नहीं लगा सकता।
सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विभाग की कार्रवाई का बचाव किया। सरकार ने राजस्थान मोटर वाहन कराधान नियमों के नियम 28 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में 30 दिनों से अधिक रहने वाले बाहरी वाहन राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1951 के तहत कराधान के लिए उत्तरदायी हैं। सरकार ने 10 जुलाई 2024 को जारी उस अधिसूचना का भी उल्लेख किया, जिसमें गैर-परिवहन वाहनों पर एकमुश्त कर की दरें निर्धारित की गई थीं, और तर्क दिया कि यह अधिसूचना अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होती है।
कोर्ट की टिप्पणी और कानूनी आधार
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पाया कि 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना में यात्री और मालवाहक वाहनों के लिए कर दरें तो निर्धारित थीं, किंतु संबंधित वैधानिक प्रावधान के तहत कोई अलग अधिसूचना नहीं थी जो विशेष रूप से अन्य राज्यों में पंजीकृत निजी गैर-परिवहन कारों पर एकमुश्त कर लगाने को अधिकृत करती हो। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराज्यीय वाहन कराधान का मुद्दा पूरे देश में विवाद का विषय बना हुआ है और कई राज्यों के बीच इसे लेकर खींचतान जारी है।
आगे क्या होगा
कोर्ट के आदेश के अनुसार, राजस्थान परिवहन विभाग को 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं से वसूला गया कर वापस करना होगा और जब्त किए गए वाहनों को तत्काल छोड़ना होगा। यह फैसला राज्य के उन सभी वाहन मालिकों के लिए मिसाल बन सकता है, जिनसे परिवहन विभाग ने इसी आधार पर कर वसूला है। राज्य सरकार के पास इस फैसले को उच्चतर न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प खुला है।