18 सितंबर 2026
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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: रांची एचईसी बाईपास रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान 31 दिसंबर तक स्थगित

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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: रांची एचईसी बाईपास रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान 31 दिसंबर तक स्थगित

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के एचईसी बाईपास रोड पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान पर तत्काल रोक लगाते हुए 31 दिसंबर तक स्वैच्छिक हटाव की समयसीमा दी। त्योहारों के मद्देनज़र दी गई यह राहत प्रभावित निवासियों और व्यापारियों के लिए अस्थायी बचाव है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को रांची के एचईसी बाईपास रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान पर तत्काल रोक लगाई।
जस्टिस आनंदा सेन ने रांची डीसी और एसएसपी को अभियान रोकने का निर्देश दिया।
अतिक्रमणकारियों को 31 दिसंबर 2026 तक स्वयं सरकारी ज़मीन खाली करने का समय दिया गया।
अदालत ने आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई पर रोक लगाई।
याचिकाकर्ताओं की पैरवी अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी अविनाश कुमार ने की।

झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को रांची के एचईसी बाईपास रोड पर जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान पर तत्काल रोक लगा दी। जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने रांची के उपायुक्त (डीसी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को यह अभियान फिलहाल आगे न बढ़ाने का स्पष्ट निर्देश दिया।

अदालत का निर्देश और समयसीमा

हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को 31 दिसंबर 2026 तक स्वयं सरकारी ज़मीन खाली करने का समय दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित अवधि दी जा रही है और इस समयसीमा के भीतर उन्हें स्वयं ज़मीन खाली करनी होगी। सुनवाई के दौरान आगामी त्योहारों को भी ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

इससे पहले जिला प्रशासन की टीम पुलिस बल और दंडाधिकारी की मौजूदगी में बिरसा चौक के नज़दीक एचईसी बाईपास रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। कार्रवाई के दौरान कुछ मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आए, जिसके बाद स्थानीय निवासियों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह अभियान फिलहाल रुक गया है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी अविनाश कुमार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिए जाने की मांग की। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 31 दिसंबर 2026 तक की समयसीमा तय की।

आम जनता पर असर

अदालत के इस आदेश से उन लोगों को फिलहाल राहत मिली है जिनके निर्माण या व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ रहे थे। मामला एचईसी बाईपास रोड पर कथित तौर पर सरकारी ज़मीन पर किए गए अतिक्रमण से जुड़ा है। गौरतलब है कि इस तरह के अभियानों में आमतौर पर दशकों पुराने निर्माण और आजीविका से जुड़े प्रतिष्ठान प्रभावित होते हैं, जिससे सामाजिक और कानूनी विवाद उत्पन्न होते हैं।

क्या होगा आगे

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, 31 दिसंबर 2026 तक संबंधित लोगों को स्वयं सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाना होगा। यदि इस समयसीमा के भीतर स्वैच्छिक हटाव नहीं होता, तो प्रशासन के लिए अगला कदम फिर से अदालत की समीक्षा के अधीन होगा। मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल समस्या — दशकों से जमा अतिक्रमण और ढीली भूमि निगरानी — को टालता है। असली चुनौती यह है कि 31 दिसंबर की समयसीमा के बाद प्रशासन क्या करेगा, और क्या अदालत का यह अस्थायी आदेश स्थायी कब्ज़े को अनजाने में वैधता देगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची एचईसी बाईपास रोड अभियान पर रोक क्यों लगाई?
जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने आगामी त्योहारों को देखते हुए और याचिकाकर्ताओं की मांग पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाई। अदालत ने माना कि संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए उचित समय मिलना चाहिए।
अतिक्रमणकारियों को ज़मीन खाली करने की समयसीमा क्या है?
हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर 2026 तक की समयसीमा तय की है, जिसके भीतर संबंधित लोगों को स्वयं एचईसी बाईपास रोड पर सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाना होगा।
रांची में एचईसी बाईपास रोड पर अतिक्रमण अभियान क्या था?
जिला प्रशासन ने बिरसा चौक के नज़दीक एचईसी बाईपास रोड पर सरकारी ज़मीन पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल और दंडाधिकारी के साथ अभियान चलाया था। इस दौरान कुछ मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए और स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया।
इस मामले में हाईकोर्ट में किसने याचिका दायर की?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी अविनाश कुमार ने अदालत में पक्ष रखा और प्रशासन की कार्रवाई पर तत्काल रोक तथा स्वैच्छिक हटाव के लिए समय दिए जाने की मांग की।
31 दिसंबर के बाद क्या होगा यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया?
हाईकोर्ट के आदेश में समयसीमा के बाद की कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन उस स्थिति में प्रशासन फिर से अभियान शुरू करने के लिए अधिकृत हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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