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क्या राजस्थान में एसीबी ने अवैध खनन मामले में अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया?

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क्या राजस्थान में एसीबी ने अवैध खनन मामले में अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया?

सारांश

राजस्थान में अवैध खनन के मामले में एसीबी ने कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में मिलीभगत का खुलासा हुआ है, जिससे राज्य को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है। जानिए इस मामले की हर जानकारी।

मुख्य बातें

राजस्थान में एसीबी ने अवैध खनन के मामले में गंभीर कार्रवाई की।
आरोपियों ने सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया।
राज्य को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आगे की जांच जारी है।

जयपुर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने खनन विभाग के अधिकारियों, क्रशर मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर अवैध खनन को वैध दिखाकर राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

एसीबी को भरतपुर क्षेत्र में खनन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर भरतपुर यूनिट ने मामले में शुरुआती जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

आरोप है कि भरतपुर के खनन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी, निजी क्रशर मालिकों और ठेकेदारों के साथ मिलकर बंद या गैर-चालू खानों के लिए जारी परमिट का दुरुपयोग करके अवैध खनन गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। इन परमिट का इस्तेमाल अवैध रूप से निकाले गए खनिजों को ट्रांसपोर्ट और प्रोसेस करने के लिए किया जाता था, जबकि उन्हें गलत तरीके से कानूनी रूप से खनन किया गया दिखाया जाता था, जिससे रॉयल्टी और अन्य सरकारी बकाया से बचा जा सके।

एसीबी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा, "आरोपियों में कोटा के माइनिंग इंजीनियर रामनिवास मंगल, तत्कालीन माइनिंग इंजीनियर राजेंद्र सिंह, माइनिंग सुपरवाइजर वीरेंद्र कुमार, तत्कालीन सुपरवाइजर भीम सिंह और तत्कालीन सर्वेयर संजू सिंह शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों के अलावा क्रशर मालिक अभिषेक तंवर, कंपनी पारस इन्फ्रा, सीडीएस इन्फ्रा और बालाजी एंड एएमपी, शुभ लाभ स्टोन क्रशर और रॉयल्टी कॉन्ट्रैक्टर देव दशरथ और अन्य संबंधित लोगों की भी संलिप्तता पाई गई।"

जांच में पता चला कि आरोपियों ने मिलीभगत करके बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया, जिसमें लाखों टन खनिज संसाधनों को निकाला गया। परमिट का गलत इस्तेमाल और रिकॉर्ड में हेरफेर करके अवैध रूप से निकाले गए माल को कानूनी दिखाया गया, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

एसीबी के बयान में कहा गया है कि खनन विभाग के अधिकारियों और प्राइवेट पार्टियों की लापरवाही व गलत कामों से आधिकारिक पद के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश का पता चलता है। शुरुआती जांच के नतीजों के आधार पर एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

बयान में कहा गया है कि अवैध खनन की पूरी सीमा का पता लगाने, राजस्व नुकसान की मात्रा तय करने, अतिरिक्त लाभार्थियों की पहचान करने और इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के लिए आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे भ्रष्टाचार की जड़ें सरकारी विभागों में फैल चुकी हैं। हमें इस पर गंभीरता से विचार करना होगा और आवश्यक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतपुर में अवैध खनन का क्या मामला है?
एसीबी ने भरतपुर में खनन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ अवैध खनन के आरोप में मामला दर्ज किया है।
यह मामला राज्य सरकार को कैसे प्रभावित करेगा?
इस मामले के चलते राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, जो आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
क्या कार्रवाई की जाएगी?
एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की योजना बनाई है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्या है?
यह अधिनियम भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और सजा के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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