8 जुलाई 2026
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राजस्थान के सूरतगढ़ और छाबड़ा संयंत्रों ने बिना विलंब शुल्क 750+ कोयला रैक उतारकर बनाया रिकॉर्ड

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राजस्थान के सूरतगढ़ और छाबड़ा संयंत्रों ने बिना विलंब शुल्क 750+ कोयला रैक उतारकर बनाया रिकॉर्ड

सारांश

राजस्थान के सूरतगढ़ और छाबड़ा ताप विद्युत संयंत्रों ने बिना विलंब शुल्क क्रमशः 750+ और 521 कोयला रैक उतारकर आरवीयूएनएल का अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। 24 घंटे काम करने वाली टीमों की यह उपलब्धि परिचालन लागत घटाने और राजस्थान में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की दिशा में अहम मानी जा रही है।

मुख्य बातें

सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (1,500 मेगावाट) ने 4 सितंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच बिना विलंब शुल्क के 750 से अधिक कोयला रैक उतारे।
छाबड़ा थर्मल पावर परियोजना (1,000 मेगावाट) ने 2 नवंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच बिना विलंब शुल्क के 521 कोयला रैक उतारे।
यह उपलब्धि सूरतगढ़ के पुराने रिकॉर्ड — 27 फरवरी से 27 जुलाई 2025 के बीच 485 रैक — को पार कर गई।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने प्रबंधन व कर्मचारियों को बधाई दी।
आरवीयूएनएल CMD देवेंद्र श्रृंगी ने इसे टीम की कड़ी मेहनत और समन्वय का परिणाम बताया।

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरवीयूएनएल) के सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और छाबड़ा थर्मल पावर परियोजना ने बिना किसी विलंब शुल्क के कोयला रैक की निर्बाध अनलोडिंग में नया राष्ट्रीय परिचालन मानक स्थापित किया है। 23 मई 2026 तक की गई इस उपलब्धि ने आरवीयूएनएल के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और राजस्थान के बिजली क्षेत्र में ईंधन प्रबंधन की दक्षता का नया अध्याय लिखा है।

मुख्य उपलब्धियाँ

1,500 मेगावाट क्षमता के सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (6x250 मेगावाट) ने 4 सितंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच बिना किसी विलंब शुल्क के 750 से अधिक कोयला रैक की अनलोडिंग की। इसी अवधि में 1,000 मेगावाट की छाबड़ा थर्मल पावर परियोजना (4x250 मेगावाट) ने 2 नवंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच बिना विलंब शुल्क के 521 कोयला रैक उतारे।

गौरतलब है कि इससे पहले सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन ने 27 फरवरी 2025 से 27 जुलाई 2025 के बीच बिना विलंब शुल्क के 485 कोयला रैक उतारकर रिकॉर्ड बनाया था — जिसे अब नई उपलब्धि ने पार कर लिया है।

विलंब शुल्क क्या होता है और यह क्यों मायने रखता है

रेलवे द्वारा विलंब शुल्क (Demurrage) तब लगाया जाता है जब कोयले से भरी रेलगाड़ी को निर्धारित समय सीमा के भीतर खाली नहीं किया जाता। यह शुल्क बिजली उत्पादन की परिचालन लागत को सीधे प्रभावित करता है। बिना विलंब शुल्क के अनलोडिंग का अर्थ है — तेज़ टर्नअराउंड, कम लागत और कोयला आपूर्ति श्रृंखला में निर्बाध प्रवाह।

सफलता के पीछे क्या रहा

अधिकारियों ने इस उपलब्धि का श्रेय दोनों संयंत्रों पर 24 घंटे कार्यरत कोयला प्रबंधन दलों और कोयला प्रबंधन प्रणालियों के कुशल संचालन व रखरखाव को दिया। समन्वित टीम वर्क और परिचालन अनुशासन को इस सफलता का आधार बताया गया।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दोनों विद्युत स्टेशनों के प्रबंधन और कर्मचारियों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि आरवीयूएनएल के अन्य संयंत्र भी इसी तरह के परिचालन मानदंड स्थापित करेंगे। ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने भी इस उपलब्धि की सराहना की और आरवीयूएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेंद्र श्रृंगी व उनकी टीम को बधाई दी। डोगरा ने सभी बिजली उत्पादन केंद्रों को बेहतर परिचालन पद्धतियाँ अपनाने और प्रदर्शन के उच्च मानकों के लिए प्रोत्साहित किया।

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेंद्र श्रृंगी ने कहा, 'यह रिकॉर्ड हमारी टीमों की कड़ी मेहनत, समन्वय और परिचालन दक्षता को दर्शाता है।' उन्होंने इसे प्रभावी प्रबंधन और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब बताया।

आगे की राह

इस उपलब्धि को राजस्थान में ईंधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने, परिचालन लागत घटाने और राज्यभर में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बिजली की माँग अपने उच्चतम स्तर पर है और कोयला आपूर्ति की निरंतरता राज्यों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह दक्षता राज्य के उपभोक्ताओं तक बिजली की सस्ती और निर्बाध आपूर्ति के रूप में पहुँचती है। राजस्थान में गर्मियों में बिजली की माँग चरम पर होती है और कोयला आपूर्ति की बाधाएँ अतीत में लोडशेडिंग का कारण बनती रही हैं। यह रिकॉर्ड संयंत्र-स्तर पर प्रबंधन की परिपक्वता दर्शाता है, पर राज्य की समग्र ऊर्जा सुरक्षा के लिए ट्रांसमिशन और वितरण की दक्षता भी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरवीयूएनएल का कोयला रैक अनलोडिंग रिकॉर्ड क्या है?
आरवीयूएनएल के सूरतगढ़ संयंत्र ने 4 सितंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच बिना विलंब शुल्क के 750 से अधिक कोयला रैक उतारे, जबकि छाबड़ा संयंत्र ने 2 नवंबर 2025 से 23 मई 2026 के बीच 521 रैक उतारे। इन दोनों उपलब्धियों ने आरवीयूएनएल के अपने पुराने रिकॉर्ड को पार किया।
विलंब शुल्क (Demurrage) क्या होता है और इससे बचना क्यों ज़रूरी है?
रेलवे द्वारा विलंब शुल्क तब लगाया जाता है जब कोयले से भरी ट्रेन को निर्धारित समय में खाली नहीं किया जाता। यह शुल्क बिजली उत्पादन की परिचालन लागत बढ़ाता है, इसलिए इससे बचना आर्थिक दक्षता के लिए अहम है।
इस रिकॉर्ड से पहले सूरतगढ़ का कौन-सा रिकॉर्ड था?
इससे पहले सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन ने 27 फरवरी 2025 से 27 जुलाई 2025 के बीच बिना विलंब शुल्क के 485 कोयला रैक उतारकर रिकॉर्ड बनाया था। नई उपलब्धि ने इसे पीछे छोड़ दिया है।
इस उपलब्धि का राजस्थान की बिजली आपूर्ति पर क्या असर होगा?
कुशल कोयला अनलोडिंग से ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होती है, परिचालन लागत घटती है और बिजली उत्पादन में रुकावट कम होती है। इससे राजस्थान के उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना बढ़ती है।
आरवीयूएनएल के CMD देवेंद्र श्रृंगी ने इस रिकॉर्ड पर क्या कहा?
आरवीयूएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेंद्र श्रृंगी ने कहा कि यह रिकॉर्ड टीमों की कड़ी मेहनत, समन्वय और परिचालन दक्षता को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रभावी प्रबंधन और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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