राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा बोले — 'भरोसा रखें, जल्द दिखेंगे बदलाव'; 5,000 आवेदकों में हुए थे चयनित
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा ने 5 सितंबर 2025 को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे अभी मंदिर परिसर की पूरी व्यवस्था को समझने में जुटे हैं और जल्द ही ठोस बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने देशभर के श्रद्धालुओं से धैर्य, भरोसा और आशीर्वाद की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
मिश्रा ने कहा, 'मैं अभी-अभी यहाँ आया हूँ और पूरे सिस्टम को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। एक बार समझ लूँ तो ट्रस्ट से मार्गदर्शन लूँगा और उसके निर्देशों का पालन करूँगा। हम अपनी टीम के सहयोग से आगे बढ़ेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना तैयार होते ही विस्तृत रणनीति सार्वजनिक की जाएगी।
उनके शब्दों में, 'कृपया हम पर भरोसा रखिए — इससे भी ज़्यादा हमें आपके आशीर्वाद की ज़रूरत है। हमने बैठकें की हैं, मंदिर का दौरा किया है और ट्रस्ट से बात की है। एक योजना तैयार हो रही है और उसे लागू करना भी शुरू कर दिया गया है। आने वाले दिनों में आपको इसके नतीजे दिखने लगेंगे।'
चयन प्रक्रिया और नियुक्ति की पृष्ठभूमि
जितेंद्र मिश्रा का चयन 2 सितंबर 2025 को 5,000 से अधिक आवेदकों के बीच से इस प्रतिष्ठित प्रशासनिक पद के लिए किया गया। वे राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ हैं — यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मंदिर परिसर का विस्तार और संस्थागत प्रबंधन दोनों ही प्राथमिकता पर हैं।
गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह पद इसलिए सृजित किया ताकि मंदिर की दैनंदिन प्रशासनिक और परिचालन जिम्मेदारियाँ एक समर्पित पेशेवर नेतृत्व के अधीन आएँ।
सैन्य पृष्ठभूमि और उपलब्धियाँ
मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में 38 वर्षों से अधिक की सेवा दी और वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए — जो वायुसेना की रणनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण कमांड में से एक मानी जाती है।
वे 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स एकेडमी और एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल में प्रशिक्षण लिया। अपने करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमानों और हेलीकॉप्टरों में 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव अर्जित किया।
सम्मान की दृष्टि से, उन्हें स्वतंत्रता दिवस 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से नवाज़ा गया। इससे पूर्व 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी उन्हें प्रदान किया जा चुका है।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
मिश्रा की नियुक्ति से उन लाखों श्रद्धालुओं को उम्मीद जगी है जो दर्शन-व्यवस्था, सुरक्षा और परिसर की सुविधाओं में सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का प्रशासनिक नेतृत्व संभालना अपने आप में एक अपरंपरागत किंतु सुविचारित चुनाव माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
मिश्रा के अनुसार, ट्रस्ट के मार्गदर्शन में एक विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत की जाएगी। परिसर के विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों के नतीजे आने वाले हफ्तों में सामने आने की संभावना है।