राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सियासी बहस, विपक्ष ने पारदर्शिता की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा 3 सितंबर 2026 को रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। जहाँ विपक्ष ने सशर्त समर्थन देते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और वक्फ बोर्ड ने इस फैसले को सराहनीय बताया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: उम्मीद के साथ सवाल भी
समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने नियुक्ति पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'वो भारतीय सेना में थे। सेना के ज़्यादातर लोग ईमानदार होते हैं। हमें उम्मीद है कि वो ईमानदारी से काम करेंगे। हालाँकि, उन पर सरकारी दबाव भी आ सकता है, ये आगे चलकर वक्त ही बताएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जितेंद्र मिश्रा ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने नियुक्ति को सकारात्मक कदम बताते हुए कड़ी जवाबदेही की माँग की। उन्होंने कहा कि मंदिर में अब तक जो गड़बड़ियाँ हुई हैं, उनमें 'छोटी मछलियों' को तो पकड़ा गया, लेकिन 'बड़ी मछलियाँ' अभी भी खुलेआम हैं। उनका कहना था कि अयोध्या सभी हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यह देश के लिए शर्मनाक स्थिति है और नए सीईओ को सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता हरीश रावत ने व्यक्ति की योग्यता पर टिप्पणी करने से परहेज़ करते हुए कहा कि यह ट्रस्ट एक खास संगठन का है, जबकि भगवान राम सबके हैं और ट्रस्ट में उनका सर्वव्यापी स्वभाव नहीं दिखता। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि यह सरकार का अधिकार है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अब राम भक्तों के दान और चढ़ावे की चोरी नहीं होगी।
BJP और सहयोगी दलों का समर्थन
BJP नेता स्मिता अग्रवाल ने कहा कि एक अनुशासित, आधुनिक और विस्तार-उन्मुख व्यक्ति की नियुक्ति से सभी मामलों में स्पष्टता आएगी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि एक रिटायर्ड एयर मार्शल पर देश की एयरलाइंस या राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी बिना शक के दी जा सकती है, तो इस नियुक्ति पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा, 'यह प्रेजेंटेशन की बात नहीं है, यह लोगों के भरोसे की बात है। आज की तारीख में भारत के लोगों को हमारी सेना पर, हमारी सेना के अफसरों पर जितना भरोसा है, उतना किसी और को नहीं है।' जनता दल (यूनाइटेड) के नेता अशोक चौधरी ने भी नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि जितेंद्र मिश्रा ने सीमा पर आतंकियों के खिलाफ अभियानों का नेतृत्व किया है, जिससे मंदिर प्रबंधन में उनका भरोसा बढ़ा है।
वक्फ बोर्ड की सराहना
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज ने इस नियुक्ति को स्वागत योग्य कदम बताते हुए कहा कि एक शानदार व्यक्ति को यह ज़िम्मेदारी दी गई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियान में जितेंद्र मिश्रा की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मंदिर में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि 'कुछ लोगों के खिलवाड़ के कारण राम मंदिर को शंका के दायरे में ला दिया गया था, वो अब नहीं रहेगा।'
यूपी चुनाव और गठबंधन पर सपा का रुख
इस मौके पर एसटी हसन ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सीट-बँटवारे का फैसला समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, आजम खान और कांग्रेस से राहुल गांधी व प्रियंका गांधी जैसे वरिष्ठ नेता करेंगे। उन्होंने जोड़ा कि गठबंधन निश्चित रूप से होगा और ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जिससे गठबंधन के भीतर कड़वाहट पैदा हो।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ थी। अब सभी दलों की निगाहें इस बात पर होंगी कि जितेंद्र मिश्रा किस तरह प्रशासनिक सुधार लागू करते हैं और पिछली गड़बड़ियों में शामिल बड़े नामों के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं। यह नियुक्ति राम मंदिर प्रशासन में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।