राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी के सामने पेश हुए संतोष दुबे, बोले — '1200 राम शिलाएं गायब, कलंक मिटाना ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जाँच कर रही विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने रविवार, 12 जुलाई को धर्मसेना के प्रमुख संतोष दुबे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पूछताछ की। पूछताछ के बाद दुबे ने मीडिया को बताया कि उन्होंने एसआईटी के समक्ष अपना पक्ष रखा है और अतिरिक्त दस्तावेज़ भी सौंपेंगे।
पूछताछ में क्या हुआ
संतोष दुबे के अनुसार, एसआईटी अधिकारियों ने उनसे जानकारी माँगी और उपलब्ध दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा। दुबे ने कहा, 'एसआईटी के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बातचीत हुई। मैं उन्हें कल और जानकारी दूंगा तथा जो कागजात हमारे पास हैं, वे भी सौंपूंगा।' उन्होंने यह भी बताया कि वे 23 जुलाई को इस मामले पर और अधिक विस्तार से बात कर सकेंगे।
मुख्य आरोप और दावे
दुबे ने एसआईटी को बताया कि 1,200 से अधिक राम शिलाएं पहले ही गायब हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के कथित कर्मों का खुलासा भी सबके सामने आ चुका है। उनका कहना है कि वे एक महीने से एसआईटी के बुलावे की प्रतीक्षा कर रहे थे।
एफआईआर और कार्रवाई की माँग
संतोष दुबे ने एसआईटी से स्पष्ट माँग की है कि उनकी एफआईआर भी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा, 'हमारे माथे पर लगे कलंक को मिटाना ज़रूरी है। अगर मेरी बातों में कोई झूठ है तो मुझ पर कार्रवाई की जाए।' यह बयान उनके उस रुख को दर्शाता है जिसमें वे स्वयं को जाँच के दायरे में रखने को तैयार हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस रोके जाने पर आपत्ति
दुबे ने यह भी कहा कि उनकी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रोक दी गई, जिसे उन्होंने 'गलत' बताया। उन्होंने कहा, 'प्रेस को रोकना बहुत गलत है।' हालाँकि, उनके अनुसार उनकी बातें लोगों तक पहुँच गई हैं। वे 23 जुलाई को एक बार फिर इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने की योजना बना रहे हैं।
आगे क्या होगा
दुबे ने भरोसा जताया कि अब न्याय मिलेगा और वे एसआईटी को और अधिक जानकारी व दस्तावेज़ उपलब्ध कराएंगे। यह मामला अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के व्यापक विवाद का हिस्सा है, जो कथित तौर पर मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों से जुड़ा है।