राम मंदिर चढ़ावा विवाद: नीरज कुशवाहा की SIT रिपोर्ट की बारीक जांच की माँग, संजय राउत का BJP पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने 24 जून 2026 को नई राजनीतिक बहस छेड़ दी, जब कई दलों के नेताओं ने मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता और एसआईटी जांच को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किए। नीरज कुशवाहा से लेकर शिव सेना (यूबीटी) के सांसदों तक, इस विवाद ने विपक्ष को सत्ता पक्ष पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।
नीरज कुशवाहा की माँगें
नीरज कुशवाहा ने आरोप लगाया कि सिंधी समाज की ओर से भेंट किए गए चांदी के वृक्ष का कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि मंदिर में ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे चढ़ावे का रोज़ाना हिसाब जनता को दिया जाए।
कुशवाहा ने सुझाव दिया कि इसके लिए बोर्ड और मॉनिटर की व्यवस्था की जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि चढ़ावे का उपयोग कहाँ हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती, तो 'आने वाले दिनों में सरकार के लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा।'
संजय राउत का BJP पर तीखा प्रहार
शिव सेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस देश में चोरों के खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं होती। राउत ने तंज कसते हुए कहा, 'भाजपा की ओर से कहा जाता है कि सोमनाथ मंदिर को गजनवी ने लूटा और अयोध्या को बाबर ने लूटा — अब भाजपा में ही बाबर और महमूद गजनवी पैदा हो गए हैं।'
उन्होंने यह भी कहा, 'जिस राम मंदिर के लिए हम लोगों ने खून बहाया, उस मंदिर को भाजपा के महमूद गजनवी की ओर से लूटा जा रहा है। सब मुंह, कान और आंख बंद करके बैठे हैं।' यह बयान विपक्ष की ओर से अब तक के सबसे तीखे हमलों में से एक माना जा रहा है।
शिव सेना (यूबीटी) के एमएलसी का बयान
शिव सेना (यूबीटी) के एमएलसी सचिन अहीर ने कहा कि खुलासा करने का कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि लोग भगवान को भी नहीं छोड़ रहे। उनका यह बयान संक्षिप्त लेकिन तीखा था, जो विपक्ष की निराशा को दर्शाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उदय सामंत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राम मंदिर में सोने या फंड से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईटी ने इस मामले की जांच कर ली है और रिपोर्ट जल्द ही जनता के सामने आएगी।
सामंत के अनुसार, एसआईटी की जांच इस विवाद को सुलझाने में सहायक होगी। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब राम मंदिर राष्ट्रीय आस्था का केंद्र बना हुआ है और किसी भी अनियमितता की खबर राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
आगे क्या होगा
एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है। विपक्षी दल पारदर्शिता की माँग पर अड़े हैं, जबकि सत्ता पक्ष एसआईटी की जांच को पर्याप्त बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।