राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर संत समाज का स्वागत, देवेशाचार्य बोले — सनातन हित में आएगा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए जाने का संत समुदाय ने खुले दिल से स्वागत किया है। संतों ने माँग की है कि इस मामले में स्वतंत्र सीबीआई जाँच, ट्रस्ट का सीएजी और फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संतों का मत है कि आस्था के इस पवित्र केंद्र में हुई घटना ने जनमानस को गहरी ठेस पहुँचाई है, और अब शीर्ष अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जाँच से सत्य सामने आएगा।
देवेशाचार्य का बयान: भ्रम खत्म होगा
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में जो घटना हुई वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'मामले में एसआईटी गठित कर निष्पक्ष जाँच हुई है। अब मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट से सनातन हित में फैसला आएगा। दोषियों को दंडित किया जाएगा।' देवेशाचार्य ने यह भी कहा कि कुछ तत्वों ने इस मामले को लेकर समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास किया, किंतु अब वह भ्रम भी समाप्त होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस कथन को याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'दूध का दूध और पानी का पानी होगा' — देवेशाचार्य के अनुसार, वह दिन अब आ गया है।
शशिकांत दास: विपक्ष के हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया
सरयू आरती समिति के अध्यक्ष शशिकांत दास ने कहा कि यह सकारात्मक बात है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही एसआईटी गठित कर जाँच की थी। जो लोग दोषी पाए गए उन्हें जेल भेजा गया और उनसे वसूली भी की गई। शशिकांत दास ने कहा कि विपक्ष के शोर-शराबे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे शुरू से यही कहते आए हैं कि दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी — और उनकी 'करनी और कथनी में कोई अंतर नहीं है।'
साधु-संतों की प्रार्थना: निष्पक्ष जाँच और आस्था की रक्षा
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि जो धर्म के पथ पर चलेगा, विजय उसी की होगी। उन्होंने कहा कि साधु-संत इस पूरे मामले पर नज़र बनाए हुए हैं और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि जाँच पूर्णतः निष्पक्ष हो तथा जो जनमानस आहत हुआ है, उसकी आस्था अक्षुण्ण बनी रहे। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव अपने उच्चतम स्तर पर है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रबंधन के अंतर्गत मंदिर में चढ़ावे की राशि में अनियमितता के आरोप सामने आए थे। राज्य सरकार द्वारा एसआईटी गठित की गई, जाँच हुई और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है। संत समुदाय इसे न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास की पुष्टि के रूप में देख रहा है। आगे सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सीबीआई जाँच और ऑडिट की माँगों पर निर्णय अपेक्षित है।