राम मंदिर चढ़ावा चोरी: थाना राम जन्मभूमि पहुंचे वकील, एफआईआर न दर्ज होने पर बोले — 'झुकेंगे नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने 13 जुलाई को थाना राम जन्मभूमि पहुंचकर अपनी शिकायत पर दर्ज एफआईआर की स्थिति जानने की कोशिश की। पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अलग एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, क्योंकि इस मामले में एक एफआईआर पहले से मौजूद है। वकीलों ने इस जवाब को अस्वीकार करते हुए आगे की कानूनी और सामूहिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मुख्य घटनाक्रम
फैजाबाद बार एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के विरुद्ध शिकायती आवेदन दिया था। कोई ठोस कार्रवाई न होने पर वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे थाना राम जन्मभूमि पहुंचा। पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को एक लिखित दस्तावेज सौंपा, जिसमें अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा था — लेकिन वकील इससे संतुष्ट नहीं हुए।
वकीलों की प्रतिक्रिया
तरुण जीत वर्मा, वरिष्ठ वकील और निर्मोही अखाड़ा, अयोध्या के अधिवक्ता, ने मीडिया से कहा कि 'हम सभी अपनी शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी लेने आए थे, लेकिन बताया गया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अब प्रतिनिधिमंडल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से मिलने के बाद पुलिस कप्तान से भेंट करेगा और आगे की रणनीति तय करेगा।
वकील राज कपूर सिंह ने दो टूक कहा, 'हम इस मामले में झुकने वाले नहीं हैं। बिना लड़ाई के कुछ हासिल होने वाला नहीं है। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं — हमसे जो भी हो सकेगा, हम करने के लिए तैयार हैं।'
पुलिस का पक्ष
थाना राम जन्मभूमि की पुलिस का कहना है कि इस मामले में एक एफआईआर पहले से दर्ज है, इसलिए एक और एफआईआर दर्ज करने का कोई आधार नहीं बनता। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। पुलिस ने वकीलों को कार्रवाई का लिखित विवरण भी सौंपा।
आम जनता और धार्मिक संस्थाओं पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर देशभर में आस्था का केंद्र बना हुआ है। चढ़ावे में कथित अनियमितता की खबरें धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर रही हैं। गौरतलब है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े नामों के विरुद्ध शिकायत दर्ज होना और पुलिस का एफआईआर से इनकार — दोनों ही इस प्रकरण को संवेदनशील बनाते हैं।
क्या होगा आगे
वकील अब बार एसोसिएशन अध्यक्ष और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के बाद घेराव, प्रदर्शन या अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे। यदि पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।