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जगन्नाथ मंदिर की भू-संपत्तियों की सुरक्षा: ओडिशा सरकार ने 11,675 राजस्व मामलों के निपटारे के निर्देश दिए

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जगन्नाथ मंदिर की भू-संपत्तियों की सुरक्षा: ओडिशा सरकार ने 11,675 राजस्व मामलों के निपटारे के निर्देश दिए

सारांश

ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की भू-संपत्तियों की रक्षा के लिए राज्यव्यापी अभियान छेड़ा है — 9 जिलों में 11,675 राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे और अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए जमीनी अधिकारियों की तैनाती के निर्देश जारी किए गए हैं।

मुख्य बातें

ओडिशा सरकार ने 13 जुलाई 2026 को भगवान श्री जगन्नाथ की भू-संपत्तियों की सुरक्षा के लिए राज्यव्यापी निर्देश जारी किए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ.
अरविंद पाधी ने राजस्व बोर्ड, आरडीसी, जिला कलेक्टरों और डीएलआरएस को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
9 जिलों की विभिन्न तहसीलों में एसजेटीए द्वारा दायर 11,675 राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे के आदेश।
ओडिशा संपदा उन्मूलन अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत दायर 257 मामलों में राजस्व बोर्ड के आदेशों को तत्काल लागू करने का निर्देश।
अवैध अतिक्रमण और धोखाधड़ी रोकने के लिए राजस्व निरीक्षकों और अमीनों की जमीनी तैनाती और नियमित निरीक्षण अनिवार्य।

ओडिशा सरकार ने 13 जुलाई 2026 को भगवान श्री जगन्नाथ की भू-संपत्तियों की सुरक्षा, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यभर के राजस्व अधिकारियों को व्यापक निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के तहत 11,675 लंबित राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे और मंदिर की भूमि पर अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है।

निर्देशों की पृष्ठभूमि

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद पाधी ने राजस्व बोर्ड, सभी राजस्व मंडल आयुक्तों (आरडीसी), जिला कलेक्टरों और भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशक (डीएलआरएस) को पत्र लिखकर मंदिर की भूमि से जुड़े सभी मामलों पर तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है। डॉ. पाधी ने स्पष्ट किया कि ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान भगवान श्री जगन्नाथ से अविभाज्य रूप से जुड़ी है और उनकी संपत्तियों की रक्षा करना राज्य का नैतिक दायित्व है।

गौरतलब है कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, गंजाम, कटक और केंद्रपाड़ा जिलों की विभिन्न तहसीलों में 11,675 विविध राजस्व मामले दायर कर रखे हैं। इन मामलों के निपटारे में तेजी लाना अब प्रशासन की प्राथमिकता बन गई है।

मुख्य निर्देश और कानूनी कार्रवाई

विभाग ने अधिकारियों को ओडिशा संपदा उन्मूलन अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत दायर 257 मामलों में राजस्व बोर्ड के आदेशों को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, निपटान-पूर्व और निपटान-पश्चात अधिकार अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियाँ तथा सहसंबंध रिपोर्टें एसजेटीए को शीघ्रातिशीघ्र उपलब्ध कराने को अनिवार्य किया गया है, ताकि राजस्व बोर्ड में लंबित मामलों का प्रभावी निपटारा हो सके।

सभी अधिकारियों को एसजेटीए द्वारा जारी कानूनों, सरकारी निर्देशों और न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश भी दिया गया है।

ज़मीनी स्तर पर निगरानी और सुरक्षा

भगवान जगन्नाथ की भूमि की पहचान, सत्यापन और सुरक्षा के लिए राजस्व निरीक्षकों, अमीनों और अन्य अनुभवी जमीनी स्तर के अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। अवैध अतिक्रमण, अनाधिकृत कब्जे, धोखाधड़ी वाले दावों और मंदिर संपत्तियों पर निजी हित स्थापित करने के प्रयासों को रोकने के लिए नियमित जमीनी निरीक्षण के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक संस्थाओं की भू-संपत्तियों पर अतिक्रमण और कानूनी विवादों की संख्या बढ़ती जा रही है। ओडिशा सरकार का यह कदम मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और कानून-सम्मत बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

जिला प्रशासन की जवाबदेही

राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिया है कि वे भगवान श्री जगन्नाथ की भूमि संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और विधिवत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय उपाय करें और अनावश्यक मुकदमेबाजी को न्यूनतम रखें। प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि वह एसजेटीए के साथ समन्वय बनाए रखे और किसी भी भूमि विवाद में त्वरित हस्तक्षेप करे।

आने वाले हफ्तों में इन निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी और राजस्व बोर्ड के स्तर पर प्रगति रिपोर्ट माँगी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

675 लंबित राजस्व मामले यह बताते हैं कि मंदिर की भूमि प्रबंधन में संरचनात्मक कमजोरियाँ वर्षों से बनी हुई हैं — एक नए निर्देश-पत्र से ये रातोंरात नहीं सुधरेंगी। असली परीक्षा यह है कि क्या जिला प्रशासन इन निर्देशों को महज़ कागजी खानापूर्ति की तरह देखता है या समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करता है। धार्मिक संस्थाओं की भूमि पर अतिक्रमण का यह मुद्दा केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है, लेकिन एसजेटीए जैसी संस्था के पास इतने बड़े पैमाने पर लंबित मामले होना प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ मंदिर की भू-संपत्तियों के लिए क्या निर्देश जारी किए हैं?
ओडिशा सरकार ने 13 जुलाई 2026 को राज्यभर के राजस्व अधिकारियों को भगवान श्री जगन्नाथ की भूमि की सुरक्षा, सत्यापन और कानूनी प्रबंधन के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं। इनमें 11,675 लंबित राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे और अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए जमीनी निरीक्षण अनिवार्य किया गया है।
एसजेटीए के 11,675 राजस्व मामले किन जिलों में दायर हैं?
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, गंजाम, कटक और केंद्रपाड़ा जिलों की विभिन्न तहसीलों में ये 11,675 विविध राजस्व मामले दायर किए हैं। सरकार ने इनके शीघ्र निपटारे को प्राथमिकता दी है।
ओडिशा संपदा उन्मूलन अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत कितने मामले हैं?
इस अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत कुल 257 मामले दायर हैं, जिनमें राजस्व बोर्ड के आदेशों को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम मंदिर की भूमि पर कानूनी अधिकार को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
जगन्नाथ मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
राजस्व निरीक्षकों, अमीनों और अनुभवी जमीनी अधिकारियों को भूमि की पहचान, सत्यापन और सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। नियमित जमीनी निरीक्षण अनिवार्य किए गए हैं ताकि अवैध अतिक्रमण, अनाधिकृत कब्जे और धोखाधड़ी वाले दावों पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
इन निर्देशों को जारी करने की जिम्मेदारी किसकी है?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद पाधी ने यह निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने राजस्व बोर्ड, सभी राजस्व मंडल आयुक्तों, जिला कलेक्टरों और डीएलआरएस को पत्र लिखकर तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
राष्ट्र प्रेस
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