राम मंदिर चढ़ावा विवाद: फैजाबाद बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला — आरोपियों की पैरवी पर ₹5 लाख जुर्माना, CBI जांच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 29 जून 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए घोषणा की कि राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्तियों की ओर से संघ का कोई भी सदस्य अधिवक्ता अदालत में पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
पैरवी पर पाबंदी और वित्तीय दंड का प्रावधान
एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार, यदि कोई सदस्य अधिवक्ता आरोपियों की ओर से वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे प्रति आरोपी ₹5 लाख की सहयोग राशि बार एसोसिएशन के पास जमा करनी होगी। कालिका मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह राशि अभियोजन पक्ष के कानूनी खर्चों के लिए उपयोग में लाई जाएगी। यह प्रावधान संघ के सदस्यों को आरोपियों का बचाव करने से प्रभावी रूप से रोकने के लिए बनाया गया है।
बाहरी अधिवक्ताओं पर भी नज़र
एसोसिएशन ने यह भी तय किया है कि यदि कोई बाहरी अधिवक्ता आरोपियों की पैरवी के लिए आता है, तो संघ उसका विरोध करेगा और यह भी जाँचेगा कि वह सरकार, विश्व हिंदू परिषद या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से किसी प्रकार से जुड़ा है या नहीं। कालिका मिश्रा के अनुसार, यह जाँच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
अभियोजन पैनल और नए मुकदमों की तैयारी
अधिवक्ता संघ ने आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी लड़ाई के लिए लगभग 15 अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया है, जो अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त, 12 अन्य लोगों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जो चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के लिए आवेदन देंगे। यदि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती, तो संघ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा और उनके अयोध्या से बाहर जाने पर रोक लगाने की माँग भी करेगा।
CBI जांच की माँग, SIT पर सवाल
कालिका मिश्रा ने कहा कि अधिवक्ता संघ की प्रमुख माँग है कि इस पूरे मामले की जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। उनका आरोप है कि सरकार ने CBI जाँच से बचने के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस संबंध में याचिकाएँ पहले से लंबित हैं। यदि उच्च न्यायालय CBI जाँच का आदेश नहीं देता, तो संघ स्वयं इस दिशा में आगे कानूनी कदम उठाएगा।
व्यापक जाँच की माँग और आगे की राह
एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि जाँच केवल वर्तमान में गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। कालिका मिश्रा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर व्यापक चर्चाएँ हो रही हैं और जनता के मन में कई सवाल हैं। संघ का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की गहन और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करना है। अब सबकी निगाहें इलाहाबाद उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।