17 जुलाई 2026
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शिवसेना (यूबीटी) का 'रामरक्षा' आंदोलन: संजय राउत बोले — मोहन भागवत को निमंत्रण देना हमारा धर्म

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शिवसेना (यूबीटी) का 'रामरक्षा' आंदोलन: संजय राउत बोले — मोहन भागवत को निमंत्रण देना हमारा धर्म

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने नागपुर में 'रामरक्षा' आंदोलन के लिए RSS सरसंघचालक मोहन भागवत को निमंत्रण देने का फैसला किया है। संजय राउत ने इसे पार्टी का 'कर्तव्य और धर्म' बताया — यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व की जमीन पर नई बहस छेड़ सकता है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 17 जुलाई को नागपुर में कहा कि RSS सरसंघचालक मोहन भागवत को 'रामरक्षा' आंदोलन में निमंत्रण देना पार्टी का कर्तव्य है।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे नागपुर में इस हिंदुत्व केंद्रित आयोजन में शामिल होंगे।
राउत ने एनसीपी (एसपी) नेताओं जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात को सामान्य राजनीतिक संपर्क बताया।
परिसीमन मुद्दे पर राउत ने सभी दलों से विचार-विमर्श की माँग का समर्थन किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का हवाला दिया।
भागवत के निमंत्रण स्वीकार करने या न करने पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 17 जुलाई को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी के प्रस्तावित 'रामरक्षा' आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को आमंत्रित करना उनका कर्तव्य है। उनके अनुसार, यह आयोजन हिंदुत्व से जुड़ा बड़ा कार्यक्रम है और नागपुर RSS का मुख्यालय होने के नाते भागवत को न बुलाना उचित नहीं होगा।

मुख्य घटनाक्रम

राउत ने कहा, 'अगर हम नागपुर में हिंदुत्व का कार्यक्रम कर रहे हैं और नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। इस मायने में नागपुर हिंदुत्व की राजधानी या उप-राजधानी भी है। हमारे मन में हमेशा सरसंघचालक के प्रति सम्मान रहा है, चाहे वे बालासाहेब देवरस रहे हों या उनसे पहले और बाद के सरसंघचालक। मतभेद हो सकते हैं लेकिन सम्मान हमेशा बना रहा है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे नागपुर आ रहे हैं और हिंदुत्व पर बड़ा कार्यक्रम हो रहा है, तो भागवत को निमंत्रण देना 'हमारा कर्तव्य और धर्म' है।

एनसीपी (एसपी) नेताओं की शिंदे से मुलाकात पर राउत का बयान

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेताओं जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात पर उठे सवालों पर राउत ने कहा कि राजनीति में नेताओं का मिलना सामान्य बात है। उन्होंने कहा, 'इसका मतलब यह नहीं कि कोई पार्टी छोड़ रहा है या किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो रहा है। जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड सभी दलों के नेताओं से मिलते रहते हैं। वे स्वतंत्र हैं और उन्हें मिलने दीजिए।'

परिसीमन पर शिवसेना (यूबीटी) का रुख

प्रस्तावित परिसीमन के मुद्दे पर राउत ने कहा कि इस विषय पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ उल्लेख है कि परिसीमन का मुद्दा देश और उसकी एकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राउत ने जोर देकर कहा कि परिसीमन पर सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श होना चाहिए और शिवसेना (यूबीटी) इस माँग से पूरी तरह सहमत है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) और RSS के बीच वैचारिक निकटता ऐतिहासिक रही है, हालाँकि हाल के वर्षों में दोनों के बीच राजनीतिक दूरियाँ बढ़ी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन अपनी हिंदुत्व साख को पुनः स्थापित करने की कोशिश में है। 'रामरक्षा' आंदोलन को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि मोहन भागवत शिवसेना (यूबीटी) के निमंत्रण पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे 'रामरक्षा' आंदोलन में शामिल होते हैं। उद्धव ठाकरे की नागपुर यात्रा और इस आयोजन की तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक संदेश है — यह दिखाना कि हिंदुत्व पर BJP का एकाधिकार नहीं है। विरोधाभास यह है कि जिस RSS से उद्धव गुट वैचारिक दूरी बनाए रखता है, उसी के प्रमुख को मंच पर बुलाने की कोशिश MVA की रणनीतिक उलझन को उजागर करती है। परिसीमन पर विपक्ष की एकजुट आवाज़ और 'रामरक्षा' आंदोलन — दोनों को एक साथ साधने की यह कोशिश बताती है कि महाराष्ट्र में 2024 के बाद विपक्ष अपनी पहचान को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) का 'रामरक्षा' आंदोलन क्या है?
'रामरक्षा' आंदोलन शिवसेना (यूबीटी) का एक प्रस्तावित हिंदुत्व केंद्रित कार्यक्रम है, जिसे नागपुर में आयोजित किया जाना है। इसमें पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे भाग लेंगे और RSS सरसंघचालक मोहन भागवत को भी निमंत्रण दिया जाएगा।
संजय राउत ने मोहन भागवत को निमंत्रण देने की बात क्यों कही?
राउत ने कहा कि नागपुर RSS का मुख्यालय है और हिंदुत्व के कार्यक्रम में सरसंघचालक को बुलाना पार्टी का 'कर्तव्य और धर्म' है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतभेदों के बावजूद RSS नेतृत्व के प्रति शिवसेना का सम्मान हमेशा बना रहा है।
एनसीपी (एसपी) नेताओं की एकनाथ शिंदे से मुलाकात का क्या मतलब है?
राउत के अनुसार, जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात सामान्य राजनीतिक संपर्क है। उन्होंने कहा कि इससे किसी के पार्टी छोड़ने या बदलने के संकेत नहीं निकाले जाने चाहिए।
परिसीमन पर शिवसेना (यूबीटी) का क्या रुख है?
शिवसेना (यूबीटी) परिसीमन पर सभी राजनीतिक दलों से व्यापक विचार-विमर्श की माँग का समर्थन करती है। राउत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यह मुद्दा देश की एकता के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या मोहन भागवत ने शिवसेना (यूबीटी) के निमंत्रण पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक RSS या मोहन भागवत की ओर से इस निमंत्रण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 'रामरक्षा' आंदोलन की तारीख और विवरण की भी आधिकारिक घोषणा बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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