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विनय महतो मौत मामला: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती, विशेष अदालत में पिता की याचिका पर सुनवाई

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विनय महतो मौत मामला: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती, विशेष अदालत में पिता की याचिका पर सुनवाई

सारांश

लगभग एक दशक बाद भी रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो की मौत का सच अदालत में विवादित है। सीबीआई ने जिसे 'दुर्घटना' कहा, पिता उसे हत्या मानते हैं — और उनकी प्रोटेस्ट पिटीशन पर विशेष अदालत की सुनवाई जारी है।

मुख्य बातें

12 वर्षीय विनय महतो की मौत 4-5 फरवरी 2016 की रात रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में हुई थी।
रांची पुलिस ने शुरू में इसे 'ऑनर किलिंग' बताया और शिक्षिका नाजिया हुसैन , उनके पति व दो नाबालिग बच्चों को गिरफ्तार किया।
जुलाई 2018 में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने साक्ष्य के अभाव में दोनों नाबालिगों को बाइज्जत बरी किया।
जुलाई 2022 में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया।
सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में मौत को दुर्घटना करार दिया, जिसे पिता मनबहाल महतो ने विशेष अदालत में चुनौती दी है।
अगली सुनवाई अगले सप्ताह विशेष सीबीआई अदालत, रांची में निर्धारित है।

रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल में फरवरी 2016 में हुई 12 वर्षीय छात्र विनय महतो की मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली मृतक के पिता मनबहाल महतो की प्रोटेस्ट पिटीशन पर शुक्रवार, 12 जून को विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में आंशिक बहस के बाद अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए निर्धारित की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान मनबहाल महतो की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारुका ने सीबीआई के निष्कर्षों का विरोध करते हुए क्लोजर रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूरी बहस सुनने के लिए अगले सप्ताह की तारीख तय की है। गौरतलब है कि यह मामला लगभग एक दशक पुराना है और न्याय की प्रतीक्षा में कई अदालती पड़ावों से गुज़र चुका है।

घटना की पृष्ठभूमि

रांची-खूंटी रोड पर स्थित सफायर इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल परिसर में 4-5 फरवरी 2016 की रात सातवीं कक्षा के 12 वर्षीय विनय महतो की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अगली सुबह उसका शव टीचर्स स्टाफ क्वार्टर के कॉरिडोर के पास खून से लथपथ अवस्था में मिला था।

प्रारंभिक जाँच में रांची पुलिस ने इसे 'ऑनर किलिंग' का मामला बताया था। पुलिस थ्योरी के अनुसार, विनय का स्कूल की हिंदी शिक्षिका नाजिया हुसैन की बेटी के प्रति झुकाव था, जिससे नाराज होकर शिक्षिका के 11वीं में पढ़ने वाले बेटे ने विनय पर जानलेवा हमला किया और उसे पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। पुलिस ने शिक्षिका नाजिया हुसैन, उनके पति मोहम्मद आरिफ और उनके दो नाबालिग बच्चों को आरोपी बनाकर जेल भेजा था।

पूर्व अदालती फैसले और जाँच की खामियाँ

जुलाई 2018 में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने साक्ष्य के अभाव में दोनों नाबालिग बच्चों को बाइज्जत बरी कर दिया, जिसके बाद जिला अदालत ने दोबारा सुनवाई का आदेश दिया था। मृतक के पिता ने पुलिस जाँच में कई खामियों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के नष्ट होने का आरोप लगाते हुए झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था।

उच्च न्यायालय के आदेश पर जुलाई 2022 में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। यह ऐसे समय में आया जब परिवार को उम्मीद थी कि केंद्रीय एजेंसी की जाँच सच्चाई सामने लाएगी।

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर विवाद

पिछले महीने मामले में नया मोड़ तब आया जब सीबीआई ने विशेष अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने अपने निष्कर्ष में हत्याकांड या आपराधिक साजिश की थ्योरी को खारिज करते हुए विनय की मौत को एक दुर्घटना करार दिया। इस निष्कर्ष से असंतुष्ट मनबहाल महतो ने सीबीआई के दावों को कोर्ट में चुनौती देते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की है।

आगे की राह

विशेष सीबीआई अदालत में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में अधिवक्ता खुशबू कटारुका की दलीलें पूरी होने की उम्मीद है। अदालत का फैसला तय करेगा कि क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की जाएगी या मामले में आगे जाँच का आदेश दिया जाएगा — और लगभग एक दशक से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे एक पिता की लड़ाई का अगला अध्याय क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

केंद्रीय एजेंसी और परिवार — तीनों की एक ही घटना पर अलग-अलग थ्योरी है। रांची पुलिस ने 'ऑनर किलिंग' बताया, JJB ने साक्ष्य के अभाव में बरी किया, और अब सीबीआई ने 'दुर्घटना' कह कर फाइल बंद करने की कोशिश की — यह तीन परस्पर विरोधी निष्कर्ष खुद जाँच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। फॉरेंसिक साक्ष्यों के नष्ट होने का आरोप यदि सच है, तो यह जवाबदेही की नहीं, जवाबदेही से बचने की कहानी है। एक पिता का नौ साल तक अदालतों में भटकना इस बात का प्रमाण है कि संस्थागत विफलता के मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की राह कितनी लंबी और थका देने वाली होती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनय महतो मौत मामला क्या है?
यह रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में 4-5 फरवरी 2016 की रात 12 वर्षीय सातवीं कक्षा के छात्र विनय महतो की मौत का मामला है। अगली सुबह उसका शव खून से लथपथ हालत में मिला था और तब से परिवार न्याय के लिए लड़ रहा है।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में हत्याकांड या आपराधिक साजिश की थ्योरी को खारिज करते हुए विनय की मौत को एक दुर्घटना करार दिया है। यह निष्कर्ष रांची पुलिस की 'ऑनर किलिंग' थ्योरी से पूरी तरह अलग है।
मनबहाल महतो ने सीबीआई रिपोर्ट को क्यों चुनौती दी है?
मृतक के पिता मनबहाल महतो सीबीआई के 'दुर्घटना' वाले निष्कर्ष से असंतुष्ट हैं और उन्होंने विशेष सीबीआई अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारुका ने सीबीआई के निष्कर्षों का विरोध करते हुए 12 जून को आंशिक बहस की।
इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है?
पुलिस ने 2016 में शिक्षिका नाजिया हुसैन, उनके पति और दो नाबालिग बच्चों को गिरफ्तार किया। जुलाई 2018 में JJB ने नाबालिगों को बरी किया। इसके बाद झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर जुलाई 2022 में मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने अब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।
राष्ट्र प्रेस
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