राव आईएएस बेसमेंट हादसा: सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी क्लीनचिट के करीब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के ओल्ड राजेंद्रनगर स्थित राव आईएएस स्टडी सर्कल के बेसमेंट में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। 13 जुलाई 2025 को दाखिल इस रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि किसी भी वरिष्ठ दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक जिम्मेदारी साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
क्लोजर रिपोर्ट में क्या कहा सीबीआई ने
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों से यह स्थापित नहीं हो सका कि वरिष्ठ एमसीडी अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों में ऐसी लापरवाही बरती जिसे इस हादसे का प्रत्यक्ष कारण माना जा सके। एजेंसी के अनुसार, इस आधार पर उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता।
हालांकि, सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में हुई जांच में जिन अधिकारियों और अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी, उनके विरुद्ध चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, कुछ एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी है।
हादसे की पृष्ठभूमि
यह दुखद घटना 27 जुलाई 2024 की है, जब भारी मानसूनी बारिश के दौरान ओल्ड राजेंद्रनगर स्थित राव आईएएस स्टडी सर्कल के बेसमेंट में अचानक पानी भर गया। इसमें यूपीएससी की तैयारी कर रहे तीन अभ्यर्थियों की डूबकर मौत हो गई थी। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और दिल्ली के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी गई थी। यह ऐसे समय में आया था जब कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और नगर निगम की निगरानी प्रणाली पर व्यापक सवाल उठ रहे थे।
दमकल अधिकारियों पर कार्रवाई
इस मामले में उपराज्यपाल की ओर से दमकल विभाग के दो अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। ये वही अधिकारी थे जिन्होंने 1 जुलाई 2024 को बिल्डिंग का निरीक्षण कर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया था — हादसे से महज 26 दिन पहले।
अदालत अब करेगी फैसला
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत अगली सुनवाई में विचार करेगी और यह तय करेगी कि रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए या नहीं। यदि अदालत रिपोर्ट अस्वीकार करती है, तो आगे की जांच का निर्देश दिया जा सकता है। पीड़ित परिवारों और छात्र संगठनों की नज़रें अब इसी अगली सुनवाई पर टिकी हैं।