उपहार अग्निकांड: सीबीआई ने पूर्व आईपीएस अमोद कांठ के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट वापस ली, राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड से जुड़े एक अहम मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमोद कांठ के खिलाफ पहले दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को वापस ले लिया है। इसके साथ ही एजेंसी ने 1 जून को राऊज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले से संबंधित एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय के 23 अप्रैल को दिए गए उस आदेश के अनुपालन में उठाया गया है, जिसमें सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
मामले का पृष्ठभूमि
उपहार अग्निकांड को देश के सबसे गंभीर औद्योगिक हादसों में से एक माना जाता है। 1997 में हुई इस त्रासदी के बाद से न्यायिक और जांच प्रक्रियाएँ दशकों तक विभिन्न चरणों से गुजरती रही हैं। सीबीआई ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमोद कांठ से जुड़े 2009 के एक मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसका उस समय भी विरोध हुआ था और कई पक्षों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
उपहार पीड़ित संघ की याचिका
सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि उपहार पीड़ित संघ ने 29 जून 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में केंद्र सरकार और सीबीआई से अभियोजन की मंजूरी से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने तथा पूरे मुद्दे पर पुनर्विचार करने की माँग की गई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई।
हाईकोर्ट का हालिया आदेश और सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 जून 2019 को दायर इस याचिका पर सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी थी। हालाँकि, 23 अप्रैल को दिए गए ताज़ा आदेश में उच्च न्यायालय ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सीबीआई ने अदालत को अवगत कराया है कि इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित है, जिसमें आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
क्लोजर रिपोर्ट वापस लिए जाने और नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल होने के बाद मामले में नई कानूनी हलचल देखी जा रही है। 6 जुलाई की सुनवाई में यह तय होने की संभावना है कि अभियोजन की मंजूरी के सवाल पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा। यह ताज़ा घटनाक्रम उन पीड़ित परिवारों के लिए भी अहम है जो तीन दशकों से न्याय की प्रतीक्षा में हैं।